राज्यसभा में बोले सुशिल मोदी- अगले 10 सालों तक पेट्रोल-डीजल को GST में लाना संभव नहीं

नई दिल्ली: संसद में वित्त विधेयक-2021 पर चर्चा के दौरान केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को निचले सदन में कहा था कि सरकार, राज्यों के प्रस्ताव लाने पर पेट्रोल-डीजल को GST के दायरे में लाने को तैयार है. किन्तु आज बुधवार को राज्यसभा में भाजपा सांसद सुशील कुमार मोदी ने अगले 8-10 साल तक ऐसा होने पर असमर्थता जाहिर की है. 

उच्च सदन में सुशील मोदी ने कहा है कि अभी पेट्रोल-डीजल पर 100 रुपये में 60 रुपये टैक्स होता है. इसमें 35 रुपये केंद्र सरकार का और 25 रुपये राज्य सरकारों का रहता है. इतना ही नहीं केंद्र के 35 रुपये में से 42 फीसद राज्य सरकारों के पास जाता है. उन्होंने कहा कि वह GST परिषद से जुड़े रहे हैं. अमूमन पेट्रोल-डीजल को GST में लाने की बात कही जाती है, वह सदन से जानना चाहते हैं कि यदि पेट्रोल और डीजल को GST में ला दिया गया, तो राज्यों को होने दो लाख करोड़ रुपये के राजस्व नुकसान की भरपाई कहां से की जाएगी. केंद्र और राज्य दोनों मिलकर इससे वार्षिक 5 लाख करोड़ रुपये का राजस्व जुटाते हैं, उसकी भरपाई कहां से होगी?

सुशील मोदी ने आगे कहा कि GST में हाईएस्ट टैक्स स्लैब 28 फीसद है . अभी पेट्रोल-डीजल पर हम 60 फीसद टैक्स ले रहे हैं. ऐसे में जो दो से ढाई लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा उसकी भरपाई कहां से की जाएगी. यदि इसे जीएसटी में ले आए तो केंद्र को 14 और राज्यों को मात्र 14 रुपये टैक्स मिलेगा. ऐसे में पेट्रोल-डीजल को GST में लाना आने वाले 8 से 10 वर्षों तक संभव नहीं है. ना तो कांग्रेस की सत्ता वाले राज्य और ना भाजपा की सत्ता वाले राज्य इसके लिए राजी होंगे.

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