पाकिस्तान से बदला लेने के लिए भारत ने बनाई रणनीति, 24 विदेशी राजदूतों से की बात

नई दिल्ली: पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद द्वारा जम्मू कश्मीर के पुलवामा में किए गए आतंकी हमले में केंद्रीय रिजर्व पुलिस (सीआरपीएफ) के 44 जवानों के शहीद होने के बाद मोदी सरकार एक्शन मोड में आ गई है और आतंकी गतिविधियों में पाकिस्तान की मिलीभगत की पोल खोलकर उसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करने की रणनीति बनाने में लग गई है. सरकार अपनी रणनीति के तहत देश के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर सबको अपने विश्वास में लेने की कोशिश में लग गई है, ताकि इस घटना का पाकिस्तान को सैन्य स्तर पर मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके.

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इस कायराना हमले के बाद मोदी सरकार के कदमों से यह संकेत मिलता है कि सरकार की रणनीति यह होगी कि आम-सहमति से बदले की कार्रवाई की जा सके, इसलिए सरकार ने विभिन्न स्तरों पर वार्तालाप शुरू कर दी है और प्रतिघात के लिए सभी विकल्पों को तलाश रही है. अमेरिका, चीन रूस, कनाडा, आस्ट्रेलिया और यूरोपीय संघ से लेकर अफगानिस्तान, इजरायल, सऊदी अरब और इंडोनेशिया सहित विश्वभर के देश भारत के समर्थन में आ गए हैं और उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एकजुटता व्यक्त की है.

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पुलवामा में हुए आतंकी हमले के एक दिन बाद भारत ने शुक्रवार को अंतर्राष्ट्रीय पटल पर पाकिस्तान को अलग-थलग करने का अभियान शुरू किया और विदेश सचिव विजय गोखले ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लगभग दो दर्जन राजदूतों से मुलाकात की. भारत ने पाकिस्तान से मोस्ट फेवर्ड नेशन (एमएफएन) का दर्जा भी वापस ले लिया.

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