झाँसी लोकसभा सीट: क्या लक्ष्मीबाई की नगरी में फिर खिलेगा कमल, ऐसा रहा है सियासी इतिहास

झाँसी लोकसभा सीट: क्या लक्ष्मीबाई की नगरी में फिर खिलेगा कमल, ऐसा रहा है सियासी इतिहास

झांसी:  चंदेल राजाओं का किला रहा झांसी में इस समय भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का कब्जा है। बुंदेलखंड की धरती का इतिहास काफी गौरवशाली रहा है। वैसे झांसी, था तो चंदेल राजाओं का किला, लेकिन, झांसी को वीरता-त्याग का पर्याय रानी लक्ष्मीबाई की धरती के नाम से अधिक पहचान मिली है। उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में झांसी सीट 46वें नंबर पर आती है। 

इस लोकसभा सीट के अंतर्गत विधानसभा की पांच सीटें आती हैं। बबीना, ललितपुर, झांसी नगर, महरौनी और मऊरानीपुर, जिनमें से महरौनी और मऊरानीपुर अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटें हैं। अगर इतिहास की बात करें तो झांसी में पहली दफा वर्ष 1952 में लोकसभा चुनाव हुआ था। पहली बार हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के रघुनाथ विनायक धुलेकर ने इस सीट से जीत हासिल की थी। वर्ष 1952 से 1977 तक के पांच आम चुनावों में कांग्रेस ने लगातार यहां जीत का परचम फहराया। वर्ष 1989 में पहली बार इस सीट से भाजपा जीती थी और उसके बाद  1998 तक के लोकसभा चुनावों में लगातार भाजपा का विजय रथ चलता रहा और राजेंद्र अग्निहोत्री यहां से चार बार सांसद निर्वाचित हुए।  

वर्ष 1999 के चुनावों में कांग्रेस ने फिर कामयाबी हासिल की। साल 2004 में समाजवादी पार्टी ने इस लोकसभा सीट पर पहली बार जीत दर्ज की। 2009 में कांग्रेस के प्रदीप जैन आदित्य ने इस सीट पर जीत हासिल की। वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के चलते भाजपा नेता उमा भारती पर झांसी के लोगों ने विश्वास जताया और संसद तक पहुंचाया। 

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