थर्ड फ्रंट की कवायद तेज

लोकसभा चुनाव 2019 में बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजयरथ को रोकने के लिए थर्ड फ्रंट की कवायद के चलते रविवार को तेलंगाना के मुख्यमंत्री और तेलंगाना राष्ट्र समिति (TRS) सुप्रीमो के. चंद्रशेखर राव ने डीएमके प्रमुख करुणानिधि और उनके बेटे एमके स्टालिन से चर्चा की. मुलाकात चेन्नई स्थित करुणानिधि के आवास पर हुई और मोदी के खिलाफ बनायीं जा सकने वाली रणनीति पर चर्चा हुई. इससे पहले थर्ड फ्रंट को लेकर चंद्रशेखर राव पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी मुलाकात और चर्चा कर चुके हैं. रविवार को डीएमके के कार्यवाहक अध्यक्ष स्टालिन ने बताया, ''तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने डीएमके प्रमुख करुणानिधि और मुझसे मुलाकात की. हमने एक साथ लंच भी किया और राजनीति पर चर्चा की. इसके बाद चंद्रशेखर राव ने सेकुलर और थर्ड फ्रंट बनाने को लेकर बातचीत की.''

उन्होंने बताया कि तमिलनाडु में कुछ खास पार्टियां हैं, जिन्होंने गठबंधन बनाया है. स्टालिन ने कहा, ''हम ऐसी राजनीतिक पार्टियों के साथ चंद्रशेखर राव की विचारधारा को लेकर चर्चा करेंगे. इस मसले पर डीएमके की उच्च स्तरीय कमेटी से सलाह-मशविरा करने के बाद मैं चंद्रशेखर राव को जवाब दूंगा. मैंने उनको इसको लेकर एक रैली आयोजित करने के अपने आइडिया से भी अवगत करा दिया है.'' मुलाकात पर चंद्रशेखर राव ने कहा, ''मैं अपने भाई से मिलने आया था और हमने कई मसलों पर विचार-विमर्श किया. हमारे बीच बातचीत में केंद्र और राज्य के बीच पॉवर शेयरिंग का मामला शामिल रहा. यह न तो किसी चीज की शुरुआत है और न ही समापन. हमने अभी तक कोई भी फैसला नहीं लिया है. पूरे देश में राजनीति और शासन व्यवस्था को लेकर बहस चल रही है. हमने फोन पर ममता बनर्जी से भी बातचीत की है. इस बात पर हमारा रुख पूरी तरह से स्पष्ट है कि भारत को सेकुलर राष्ट्र होना चाहिए.''

चंद्रशेखर राव ने कहा कि स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन, शहरी और ग्रामीण विकास के मुद्दे पर राज्यों को ज्यादा शक्ति मिलती चाहिए. केंद्र सरकार को सिर्फ बाहरी मामलों की चिंता करनी चाहिए. इस दिशा में पहल करने वाले देशों ने जापान की तरह तेजी से विकास किया. अब भारत को भी ऐसा ही करना चाहिए. भारत को अपनी अर्थव्यवस्था को स्वछंद रखना चाहिए. तेलंगाना राष्ट्र समिति प्रमुख चंद्रशेखर राव ने कहा, ''मैं साल 2004 में डीएमके प्रमुख करुणानिधि से आशीर्वाद लेने आया था. हम दोनों दल यूपीए सरकार में भागीदार थे. आज भी मुझे उनका आशीर्वाद मिला है, जिससे मैं खुश हूं. वो दक्षिण भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं. हम इस मसले पर कई और नेताओं से बातचीत करेंगे. हम तेलंगाना में रिकॉर्ड जीत दर्ज कर चुके हैं. गौरतलब है कि फ़िलहाल तीसरे मोर्चे की कवायद तेज हो चुकी है और ज्यादातर इसी को बीजेपी के खिलाफ सबसे कारगर हथियार मान रहे है.  

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