Pegasus Case: 'गवाहों के पेश नहीं होने जैसे तरीकों से सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई में नहीं डाल सकते बाधा': शशि थरूर

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बीते बुधवार को यह आरोप लगाया कि गवाहों के पेश नहीं होने या उपस्थिति रजिस्टर पर हस्ताक्षर नहीं करने जैसे इंकार करने के तरीकों से सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई को बाधित नहीं किया जा सकता है। जी दरअसल सूचना प्रौद्योगिकी पर बनी संसद की स्थायी समिति के अध्यक्ष थरूर ने अपने इस बयान से समिति द्वारा पेगासस मुद्दे पर चर्चा के दौरान उत्पन्न बाधाओं की ओर इशारा किया।

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इजराइली स्पाईवेयर 'पेगासस' के जरिए भारत में कुछ लोगों की कथित जासूसी के मामले की जांच के लिए बुधवार को विशेषज्ञों की तीन सदस्यीय समिति का गठन किया और कहा कि सरकार हर बार राष्ट्रीय सुरक्षा की दुहाई देकर बच नहीं सकती और इसे 'हौवा' नहीं बनाया जा सकता जिसका जिक्र होने मात्र से कोर्ट खुद को इस मामले से दूर कर ले। जी दरअसल अदालत का यह आदेश आने के बाद शशि थरूर ने ट्वीट किया है और लिखा है, ‘सुप्रीम कोर्ट ने भारत सरकार द्वारा पेगासस जासूसी सॉफ्टवेयर उपयोग किए जाने को लेकर जांच के आदेश दिए। ऐसा इसलिए क्योंकि तलब किए जाने पर गवाहों के पेश नहीं होने या सदस्यों द्वारा उपस्थिति रजिस्टर पर हस्ताक्षर करने से इंकार करने जैसे तरीकों से सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई को बाधित नहीं किया जा सकता, जिन तरीकों से संसदीय समिति के काम में रूकावट डाली गई।’

आप सभी को बता दें कि शशि थरूर के नेतृत्व वाले आईटी पैनल को 28 जुलाई को एक बैठक करनी थी, इसमें पेगासस जासूसी के आरोपों सहित कई मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद थी। वहीं पैनल ने ‘नागरिक डेटा सुरक्षा और गोपनीयता’ के मुद्दे पर इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, गृह मंत्रालय और संचार मंत्रालय (दूरसंचार विभाग) के अधिकारियों को समन भी किया था, हालांकि बैठक नहीं हो सकी क्योंकि पैनल के बीजेपी सदस्यों ने अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करवाई।

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