आर.डी. बर्मन के साथ इस सैक्‍सोफ़ोनवादक ने कमाया था नाम, कभी उनका अरेंजर बनकर भी किया काम

मनोहरी सिंह एक ऐसे सैक्‍सोफ़ोनवादक जो आज हमारे बीच तो नहीं है, लेकिन वे अपनी शानदार कला के दम पर आज भी हर किसी के दिल में ज़िंदा है. आज ही के दिन साल 1931 को इस महान कलाकार ने पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक नेपाली परिवार में जन्म लिया था. वे प्रसिद्द फिल्म संगीतकार आर.डी. बर्मन के मुख्य अरेंजर भी थे. जबकि संगीतर की रचना करने में उनकी जोड़ी को बासुदेव चक्रवर्ती के साथ खूब पसंद किया गया. आज भी फ़िल्मी गलियारों में इस मशहूर जोड़ी को एक साथ बसु-मनोहारी के रूप में पहचाना जाता है. 

हिंदी सिनेमा में उन्होंने अपना पहला कदम साल 1958 में रखा. मनोहरी ने 1958 में मुंबई में अपनी किस्मत आजमाने का फैसला किया था और इसके बाद उनका पहला ब्रेक 1958 में सचिन देव बर्मन के साथ फिल्म सितारों से आगे के लिए सैक्सोफोनिस्ट के रूप में था. उन्होंने अपने करियर में कई अन्य संगीत निर्देशकों के साथ काम किया, लेकिन उनकी जोड़ी आर डी बर्मन के साथ भी खूब जमी. जहां उनके साथ मनोहरी सिंह ने कई रचनाओं में सैक्सोफोन से मधुर ताल छेड़ी. 

मनोहरी के पिता और चाचा पीतल के बैंड से खेला करते थे. साल 1942 में उन्होंने हंगरी के कंडक्टर जोसेफ न्यूमैन के तहत कोलकाता के बाटा नगर में बाटा शू कंपनी में ब्रास बैंड में वे शामिल हुए और फिर 1945 में जब एचएमवी में शामिल होने के लिए न्यूमैन रवाना हुए, तब मनोहरी भी उनके साथ चले गए. जहां इस महान सेक्सोफोनवादक ने एचएमवी ऑर्केस्ट्रा के लिए हिंदी और बंगाली गाने बजाने शुरू किए, क्योंकि न्यूमैन ने कमल दासगुप्ता, एस डी बर्मन, तिमिर बरन और रवि शंकर जैसे कई संगीतकारों के लिए संगीत की व्यवस्था की. वे पहले अंग्रेजी की प्रमुख बांसुरी, शहनाई और मैंडोलिन में अपना हाथ आजमा चुकी थे, लेकिन अंततः उन्होंने सैक्सोफोन को थामकर दुनियाभर में पहचान बनाई. 

 

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