'जजों को सोच-समझकर बोलना चाहिए..', केंद्रीय कानून मंत्री को क्यों कहना पड़ी ये बात ?

नई दिल्ली: केंद्रीय कानून मंत्री किरण रिजीजू (Kiren Rijiju ) ने न्यायपालिका, विधायिका और निर्वाचन आयोग के बीच तालमेल पर बात करते हुए न्यायाधीशों को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि निर्वाचन आयोग के संबंध में जजों को सोच-समझकर बोलना चाहिए. परिस्थितियों को समझना चाहिए. उन्होंने कहा कि, न्यायपालिका, विधायिका और चुनाव आयोग के बीच समन्वय होना आवश्यक है, मगर किसी के काम में दखल नहीं होना चाहिए. किसी की भी आलोचना करना सही है और की जा सकती है, मगर भाषा का मर्यादा रहना चाहिए. 

उन्होंने आगे कहा कि, अदालतों को भी ध्यान देना चाहिए कि वो किस प्रकार के शब्दों का इस्तेमाल कर रही है. हर कोई अपना काम कर रहा. तीखी आलोचना करने में बुराई नहीं है, लेकिन अच्छे कामों की प्रशंसा भी होनी चाहिए. रिजिजू ने आगे कहा कि, देशभर में नागरिकों के पास वोटर कार्ड होता है और ये सबसे अहम है, जो नागरिक अधिकार और लोकतंत्र के महत्व को प्रदर्शित करता है. केंद्रीय निर्वाचन आयोग ने इतने वर्षों में बहुत बेहतरीन काम किया है. उन्होंने कहा कि, ‘मेरा खुद का पिछले 7 चुनावों के लड़ने का अनुभव भी काफी अच्छा रहा है. यही भारत के लोकतंत्र को और सशक्त बनाता है.’

उन्होंने कहा कि, ‘मैंने सुप्रीम कोर्ट-हाई कोर्ट के न्यायाधीशों और अपने सहयोगियों को तालमेल बनाकर चलने के लिए कहा है. निर्वाचन आयोग के बारे में जजों को सोच-समझकर बोलना चाहिए. परिस्थितियों को समझना चाहिए.’ उन्होंने कहा कि, ‘संसद से लॉ रिफॉर्म वाला बिल पारित तो हो गया, पर मुझे जो सराहना करनी थी, हंगामे के चलते उसका अवसर नहीं मिला. आने वाले दिनों में और भी चुनाव सुधार किए जाएंगे.’

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