एमपी: अब तक 25 सालों में यहां से नहीं जीत पाई कांग्रेस, अब भी राह मुश्किल

एमपी: अब तक 25 सालों में यहां से नहीं जीत पाई कांग्रेस, अब भी राह मुश्किल

नई दिल्ली : मध्य प्रदेश राज्य में इस साल के अंत में ही चुनाव होने है. यहाँ सभी पार्टियां जोरो शोरो से चुनाव तैयारी में जुटी है. ज्ञात हो की पिछले 15 सालों से कांग्रेस राज्य की सत्ता से दूर है और इस बार सत्ता में वापसी के लिए पार्टी नेता कड़ी मशक्कत कर रहे है. आपको बता दें कि मध्य प्रदेश में  230 सदस्यों वाली विधान सभा में 80 सीटें ऐसी हैं जो कांग्रेस के मिशन मध्य प्रदेश में बड़ी मुश्किल बन सकती है. 80 सीटों में से 50 पर कांग्रेस पिछले दो-तीन विधान सभा चुनाव में लगातार मुँह की खा रही है. बता दें कि इन 80 मेसे 24 ऐसी सीटें हैं जिन पर कांग्रेस ने करीब पिछले 25 साल से एक भी चुनाव नहीं जीता.

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कांग्रेस के लिए मुश्किल खड़ी करने वाली यह  24 सीटें राज्य के 17 जिलों के अंतर्गत आती हैं. इन विधान सभा सीटों में हरसुंड और खंडवी भी शामिल है. राज्य के स्कूली शिक्षा मंत्री कुंवर विजय शाह 1990 से लगातार हरसुंड सीट पर अपना कब्ज़ा जमाए हैं जबकि भोपाल के गोविंदपुरा से पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बाबूलाल गौर 1980 से लगातार बने हुए हैं. 

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इसी तरह से भिंड जिले की महगांव सीट, मुरैना जिले की अंबा, शिवपुरी जिले की शिवपुरी और पोहरी, सागर जिले की सागर और रेहली, सतना जिले की रामपुर बघेलन, रायगांव, रीवा जिले की देव तालाब , त्योंथार, सिहोर जिले की सिहोर और आस्था, अशोक नगर जिले के अशोक नगर, छतरपुर जिले की महाराजपुर, सिवनी जिले की बारघाट, जबलपुर जिले की जबलपुर कैन्ट और होशंगाबाद जिले की सोहागपुर सीटों पर भी लंबे समय से भाजपा उम्मीदवार अब तक कांग्रेस को हराते आ रहे है.

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