'फर्जी ख़बरें' Twitter के लिए अभिव्यक्ति की आज़ादी क्यों ?

नई दिल्ली: केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Twitter की जमकर खिंचाई की है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया के बेहद ही शक्तिशाली जरिया है और हमारे जीवन में इसका खासा प्रभाव है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया की जवाबदेही कैसे तय हो, ये मुद्दा विश्व के कई हिस्सों में एक वैध सवाल बन चुका है। उन्होंने कहा कि पूरे विश्व में देश-समाज इस दिशा में जा रही है कि सोशल मीडिया को उत्तरदायी बनाना आवश्यक है।

 

लेकिन, अब सवाल ये है कि इसे किया कैसे जाएगा? इस पर अश्विनी वैष्णव ने कहा है कि सेल्फ-रेगुलेशन बेहद अहम है, जिसके तहत इन्हें समाज में नकारात्मक असर डालने वाले कंटेंट्स को खुद ही दूर कर देना चाहिए। उन्होंने आगे इंडस्ट्री रेगुलेशन और फिर सरकारी रेगुलेशन को लेकर बात की। उन्होंने बताया कि पूरे विश्व में एक ऐसा इकोसिस्टम या थॉट प्रोसेस बन रहा है कि सोशल मीडिया को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए और जैसे पत्रकार इतनी मेहनत कर के कंटेंट क्रिएट करते हैं, तो इसका लाभ आपको भी मिलना चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि यदि फेसबुक से इससे राजस्व मिल रहा है, तो आपको भी इसका हिस्सा मिलना चाहिए। उन्होंने इस प्रक्रिया में सभी को हिस्सेदार बनाने की भी बात की। बता दें कि Twitter ने मोदी सरकार के विरुद्ध कानूनी लड़ाई लड़ने का निर्णय लिया है और भड़काऊ कंटेंट्स नहीं हटा रहा है। कंपनी का कहना है कि कुछ अधिकारी नियमों का दुरूपयोग कर रहे हैं, ऐसे में इनकी न्यायिक समीक्षा की जानी चाहिए। Twitter को IT मंत्रालय द्वारा चेतावनी भी दी जा चुकी है कि बात न मानने की स्थिति में उसके खिलाफ आपराधिक केस दर्ज किया जा सकता है।

केंद्र ने Twitter को खालिस्तानी समर्थक एकाउंट्स पर कार्रवाई को कहा था। ‘किसान आंदोलन’ के वक़्त अफवाहों का बाजार गर्म करने के लिए झूठी सूचनाएँ जम कर फैलाई गई थीं, ऐसे में इन कंटेंट्स को हटाने के लिए भी कहा गया था। साथ ही कोरोना को लेकर भड़काऊ और फर्जी कंटेंट्स फ़ैलाने वाले एकाउंट्स पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन, Twitter ने इन्हें ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी’ मान कर इनके विरुद्ध कार्रवाई नहीं की और सरकार के खिलाफ ही खड़ा हो गया।

Twitter को भड़काऊ और अफवाहों वाले कंटेंट्स हटाने के लिए 4 जुलाई तक की मोहलत दी गई थी। Twitter ने कई हैंडल्स पर कार्रवाई की भी, मगर अब वो इसकी समीक्षा पर उतर आया है। कर्नाटक उच्च न्यायालय में भी Twitter ने सरकार के आदेशों को चुनौती दे दी है। नए IT नियमों को मानने में भी सोशल मीडिया कंपनी ने काफी टालमटोल की थी। बता दें कि, Twitter लद्दाख को चीन का हिस्सा दर्शा चुका है, B.1.617 को कोरोना का भारतीय वेरिएंट बता चुका है और कई फर्जी ख़बरें फैलाने वाले हैंडल्स की जगह कई सही हैंडल्स पर भी कार्रवाई कर चुका है।

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