आखिर क्यों स्मार्टफोन से डर रहे लोग ?

आखिर क्यों स्मार्टफोन से डर रहे लोग ?

वर्तमान समय में भारत में तकरीबन 85 फीसदी लोग स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं और इनमें से अधिकांश का मानना है कि स्मार्टफोन उनकी निगरानी करता है, साथ ही फोन में मौजूद उनकी निजी जानकारियां सुरक्षित नहीं हैं. कई भारतीयों का यह भी मानना है कि वाई-फाई राउटर भी उनकी जासूसी करता है. हाल ही में एक रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि गूगल की आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस वाली वॉयस असिस्टेंट सर्विस गूगल असिस्टेंट सर्विस लोगों की निजी बातचीत को रिकॉर्ड करता है.इंटरनेट आधारित बाजार शोध और डाटा एनालिटिक फर्म यूगव की हाल ही में जारी एक सर्वे रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि 52 फीसदी भारतीयों को लगता है कि इंटरनेट आधारित गैजेट खासतौर पर स्मार्टफोन, उनकी जानकारी के बिना निजी सूचनाओं को रिकॉर्ड करता है. आइए जानते है पूरी जानकारी विस्तार से 

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हाल ही सामने आए एक सर्वे के अनुसार यह भी पता चला है कि अधिकांश लोग इस तथ्य पर भरोसा करते हैं कि इंटरनेट से जुड़े हुए गैजेट जासूसी करते हैं. हालांकि इनको इस्तेमाल करने वालों की संख्या बहुत अधिक नहीं है. सिक्योरिटी कैमरा को लेकर 1,045 लोगों पर किए गए सर्वे में खुलासा हुआ कि सिर्फ 14 फीसदी लोग ही इसका उपयोग करते हैं. 27 फीसदी का कहना है कि यह उनकी निगरानी करता है. सर्वे में शामिल 15 फीसदी लोग ही स्मार्ट वॉयस असिस्टेंट डिवाइस का इस्तेमाल करते हैं, जबकि 21 फीसदी लोग मानते हैं कि यह उनकी एक्टिविटी पर नजर रखता है. यूगव के सर्वे में ये बात भी सामने आई है कि देश में 85 फीसदी लोग ऑनलाइन प्राइवेसी को लेकर चिंतित हैं, इनमें से 54 फीसदी लोगों को लगता है कि स्मार्टफोन उनकी निगरानी कर रहा है और उसमें मौजूद उनकी निजी जानकारियां सुरक्षित नहीं हैं. वहीं 33 फीसदी लोग मानते हैं  कि इंटरनेट से कनेक्ट कंप्यूटर में उनकी जानकारियां सेफ नहीं हैं. वहीं 25 फीसदी को लगता है कि वाई-फाई राउटर भी उनकी जासूसी करता है.

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इस मामले में कंपनी का कहना है कि सर्वे में शामिल 55 फीसदी लोग ये मानते हैं कि स्मार्टफोन और कंप्यूटर में सेव फोटो, ई-मेल, फाइनेंशियल जानकारियां खोने का खतरा सबसे ज्यादा है. वहीं 53 फीसदी लोग साइबर आतंकवाद दूसरा बड़ा खतरा मानते हैं.सर्वे में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. 53 फीसदी लोग अपनी जरूरी फाइल्स और फोटोज की गोपनीयता को सुनिश्चित करने के लिए अपनी डिवाइसेज में पासवर्ड लगाते हैं, जबकि 48 फीसदी लगातार अपडेट और एंटीवायरस का सहारा लेते हैं. वहीं 42 फीसदी यूजर्स पब्लिक वाई-फाई का इस्तेमाल करने से बचते हैं. 41 फीसदी यूजर्स अनजान थर्ड पार्टी एप को डाउनलोड करने से बचते हैं। जबकि 40 फीसदी लोग एप की परमिशन को सीमित रखना पसंद करते हैं.

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आपकी जानकारी के लिए बता दे कि वेबकैम को भी लोग संदेह की दृष्टि से देखते हैं. सर्वे में खुलासा हुआ है कि कई महिलाएं वेबकैम का काम न होने पर उसे कपड़े से ढंककर रखती हैं और ऑनलाइन फ्रॉड से बचने के लिए फोन बैंकिंग का इस्तेमाल करने से बचती हैं, जबकि पुरुष इनकॉग्निटो मोड पर इंटरनेट चलाना पसंद करते हैं और प्राइवेसी बनाये रखने के लिए वीपीएन नेटवर्क का इस्तेमाल करते हैं.गूगल रिकॉर्ड करता है बातचीतगूगल ने भी माना है कि वह आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस वॉयस असिस्टेंट सर्विस गूगल असिस्टेंट के जरिये यूजर्स की बातचीत को रिकॉर्ड कर रहा है. पिछले दिनों डच भाषा में गूगल असिस्टेंट की कुछ रिकॉर्डिंग्स बेल्जियम के पब्लिक ब्रॉडकास्टर वीआरटी पर लीक हुई थीं. वीआरटी ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि इनमें से अधिकांश को जानबूझ कर रिकॉर्ड किया गया था, वहीं गूगल उन बातचीतों को भी सुनता है, जिनमें से कुछ में संवेदनशील जानकारियां और निजी वार्तालाप भी शामिल होते हैं.

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