फांसी से बचा यासीन मलिक, कोर्ट ने सुनाई ये सजा

नई दिल्ली: दिल्ली की एक स्पेशल कोर्ट ने आतंकी फंडिंग के मामले में दोषी करार जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के अलगाववादी नेता यासीन मलिक को उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही 10 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है। किसी तरह की अप्रिय घटना न होने पाए, इसके लिए सुरक्षा एजेंसियां कश्मीर घाटी में पैनी नजर बनाए हुए हैं।  

 

वही इससे पहले बृहस्पतिवार को कोर्ट ने मलिक को  टेरर फंडिंग मामले में दोषी करार दिया था। यासीन मलिक ने सुनवाई के चलते स्वीकार किया था कि वह कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में लिप्त था। कोर्ट ने माना है कि मलिक ने 'आजादी' के नाम जम्मू कश्मीर में आतंकवादी तथा अन्य गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए धन जुटाने के उद्देश्य से पूरी दुनिया में एक नेटवर्क स्थापित कर लिया था। इस सिलसिले में NIA ने स्वत: संज्ञान लेते हुए 30 मई 2017 को मामला दर्ज किया था। इस मामले में एक दर्जन के अधिक आरोपियों के खिलाफ 18 जनवरी 2018 को आरोपपत्र दाखिल किया गया था। 

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने कोर्ट में कहा था कि, लश्कर-ए-तैयबा, हिजबुल मुजाहिदीन, JKLF, जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों ने पाकिस्तान की ISI के सहयोग से नागरिकों और सुरक्षाबलों पर हमला करके घाटी में बड़े पैमाने पर हिंसक वारदातों को अंजाम दिया है। यासीन मलिक ने कोर्ट में कहा था कि वह UAPA की धारा 16 (आतंकवादी गतिविधि), 17 (आतंकवादी गतिवधि के लिए धन जुटाने), 18 (आतंकवादी कृत्य की साजिश रचने), व 20 (आतंकवादी संगठन का सदस्य होने) और IPC की धारा 120-बी (आपराधिक साजिश) व 124-ए (देशद्रोह) के तहत खुद पर लगे इल्जामों को चुनौती नहीं देना चाहता। 

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