निःस्वार्थ सेवा भावना से इंदौर में स्वास्थ्य सेवा दे रहीं हैं उदयगढ़ की बेटियां

उदयगढ़ : आज के समय में मानवता दिखाना ही बड़ा धर्म है और यह समय तो हम सभी के लिए बहुत गंभीर है. इस समय कोरोना वायरस ने सभी को घेरा हुआ है और लोग इससे बचने के लिए अपने-अपने घरों में कैद हैं. ऐसे में कई कोरोना योद्धा हैं जो इस महामारी के खिलाफ लड़ाई में जुटे हैं. इन्हीं में शामिल हैं उदयगढ़ की दो बेटियां सायना और नीलोफर. आप सभी को बता दें कि दोनों सगी बहनें इस समय इंदौर में स्वास्थ्य सेवा दे रही हैं, जहां खतरा सबसे ज्यादा है. जी दरअसल गांव की दोनों बेटियां दिसंबर 2019 से इंदौर में हैं और वहां के सीएचएल अपोलो हॉस्पिटल में अपनी सेवाएं दे रही हैं.

आप सभी को बता दें कि सायना बाल चिकित्सा इकाई में सहयोगी हैं जबकि नीलोफर कैथ लैब में कार्यरत हैं. वहीं खबरों के मुताबिक दोनों चार महीने से परिवार से दूर हैं और मानवता का धर्म निभाने में आगे आ रहीं हैं. सायना और नीलोफर के पिता ने काफी समय पहले ही पत्नी और अपने बच्चों को छोड़ दिया था और इसके बाद मां और नानी ने मिलकर दोनों की परवरिश की. दोनों की मां ने बेटियों को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए लोगों के घरों में काम किया, और नानी ने भी अपना जीवन दोनों की बेहतर शिक्षा के लिए लगा दिया.

खुद सायना व नीलोफर का कहना है कि, ''नानी उदयगढ़ स्वास्थ्य केंद्र में वार्ड ब्वॉय थीं. इतनी तनख्वाह में किसी तरह गुजारा ही हो सकता था. इसलिए मां और नानी ने लोगों के यहां काम किया. अन्य खर्चों में कटौती की और दोनों को पढ़ाया.'' इससे यह तो पता चलता है कि निःस्वार्थ सेवा भावना के संस्कार उन्हें मां व नानी से विरासत में मिले हैं. वैसे सायना व नीलोफर ने 4 महीने से अपनी मां, नानी व अन्य सदस्यों को नहीं देखा है क्योंकि उनके घर पर स्मार्टफोन नहीं है, इसलिए केवल दोनों उनसे बातें ही कर पाती हैं. दोनों की यह कहानी दिल को छू लेने वाली है वाकई में कुछ लोग समाज में एक मिसाल के तौर पर सामने आते हैं जो बड़ा बेहतरीन है. 

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