ममता की रणनीति से मोदी होंगे सत्ता से बाहर

मौजूदा दौर में देश की राजनीति में काफी उथल-पुथल मची हुई है. टुकड़ों में बंटी विपक्ष को एक जुट करने को लेकर कमान अब बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपने हाथों में ले ली है, इसी के तहत ममता बनर्जी अब विपक्ष के नेताओं से लेकर बीजेपी के बागी नेताओं से मिलने काम कर रही है, कयास यह भी लगाए जा रहे है कि यह सभी तैयारियां 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर की जा रही है.

बुधवार को ममता बनर्जी, सोनिया गांधी, अरविंद केजरीवाल और बीजेपी के बागी नेताओं यशवंत सिन्हा, शत्रुघ्न सिन्हा और अरुण शौरी से अलग-अलग मिलती रहीं. मिलने का यह सिलसिला गुरुवार को भी जारी रहेगा. ममता का कहना है कि पिछले चुनावों के नजरिए से देखा जाए तो पूरा विपक्ष अगर एक जुट हो जाए तो बीजेपी को हराना कोई मुश्किल काम नहीं है. साथ ही ममता ने कहा कि आपस में मत लड़ो बीजेपी से लड़ो यही ममता की जीत का मन्त्र भी है.

कुछ बिंदु जो विपक्ष की प्लानिंग का हिस्सा है:

1 . 2014 चुनावों में बीजेपी को टोटल 31% वोट मिले थे वहीं विपक्ष के टोटल वोट 69% थे, इस लिहाज से देखा जाए तो विपक्ष हावी हो सकता है.
2 . जिस राज्य में जो पार्टी ताकतवर है, वह सीधे बीजेपी से लड़े और बाकि दल उसे समर्थन करे.
3 . 2019 चुनाव में बीजेपी के उम्मीदवार के सामने विपक्ष का सिर्फ एक ही उम्मीदवार हो.
4 . विपक्ष के एक होने पर नतीजे फूलपुर और गोरखपुर उपचुनाव जैसे होंगे, जो बीजेपी को सत्ता से बाहर फेंकने में मदद करेंगे. 

ममता का प्लान असरदार है या नहीं यह तो चुनावों और दूसरी पार्टियों के निर्णय के बाद ही पता चलेगा. लेकिन एक बात जो ममता की प्लानिंग को परेशान करेगी वह है विपक्ष का नेता कौन होगा, और ज़ाहिर सी बात है इस फैसले से कांग्रेस के पेट में जरूर दर्द होगा. क्योंकि कांग्रेस पीएम पद के लिए राहुल को मैदान में उतारने की तैयारी कर रहा है वहीं विपक्ष की पार्टी या ममता बनर्जी खुद राहुल को प्रधानमंत्री पद के लिए मजबूत दावेदार नहीं मानती. 

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