ममता ने ढूंढा भाजपा से निपटने का तरीका, बनाई ये रणनीति

ममता ने ढूंढा भाजपा से निपटने का तरीका, बनाई ये रणनीति

कोलकाता: गत कुछ वर्षों से पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का एकछत्र राज रहा है, लेकिन यह चुनाव उसके लिए बेहद चुनौती भरे हो सकते हैं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से उसे कड़ी चुनौती मिलती दिख रही है। राष्ट्रीय राजनीति में अपनी भूमिका सशक्त करने की कोशिश में जुटीं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी किंगमेकर के तौर पर भी उबर सकती हैं।

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उनका प्रयास है कि लोकसभा में भाजपा और कांग्रेस के बाद तृणमूल कांग्रेस सीटों के मामले में तीसरे नंबर पर रहे। इसके लिए उन्होंने विशेष रणनीति बनाई है, जो उनके 42 सीटों के उम्मीदवारों के चयन में भी दिखती है। उनकी यह रणनीति त्रिस्तरीय है।  ममता बनर्जी ने 34 वर्तमान सांसदों में से 8 का टिकट काट दिया है, जबकि दो ने पार्टी छोड़ भाजपा का दामन थाम लिया है। इससे साफ़ है कि ममता बनर्जी ऐंटी-इन्कम्बैंसी से बचने के लिए सांसदों के टिकट काट नए प्रत्याशी उतार रही हैं। स्थानीय मुद्दों पर जनता की नाराजगी से बचने का यह कारगर उपाय हो सकता है। 

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भाजपा से मिल रही कड़ी चुनौतीऔर जनता के रुझान को देखते हुए ममता बनर्जी ने 17 प्रत्याशी ऐसे तय किए हैं, जो पहली बार लोकसभा जाने की तैयारी में हैं या फिर उनकी सीट बदल दी गई है। सत्ता विरोधी लहर से निपटने का यह भी एक उपाय है। ममता का यह कार्ड भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। उन्होंने 40 प्रतिशत से अधिक टिकट महिला उम्मीदवारों को दिए हैं। महिलाओं को अपने पक्ष में करने का यह सबसे सरल तरीका माना जा रहा है। 

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