दुर्योधन के बालहठ के कारण हस्तिनापुर का हुआ विभाजन

लॉकडाउन में लोग एक बार फिर महाभारत का आनंद ले पा रहे हैं. वहीं आइए जानते हैं कि बीते सोमवार महाभारत की कहानी किस मोड़ तक पहुंची और आगे इसमें क्या-क्या दर्शकों को देखने को मिलेगा. पांडवों के जीवित होने का समाचार जानकार शकुनि ने दुर्योधन के सामने हस्तिनापुर की राजगद्दी पाने के लिए नया पासा फेंका. इसके साथ ही उसने दुर्योधन को बालहठ करने का सुझाव दिया. वहीं दुर्योधन अपने पिता धृतराष्ट्र के पास आता है और पांडवों के आने पर नाराज़गी जताता है. वहीं धृतराष्ट्र दुर्योधन को उसके लाक्षागृह के षड़यंत्र को गलत ठहरता है और युधिष्टर को हस्तिनापुर का पहला युवराज बताता है तो दुर्योधन क्रोधित होकर कहता है कि वो युवराज की गद्दी से नहीं हटेगा, और यदि धृतराष्ट्र ने उसे ऐसा करने को कहा तो वो आत्महत्या कर लेगा. ये सुनते ही धृतराष्ट्र चिंतित हो जाते हैं और उसे वचन देते हैं कि दुर्योधन का जो अधिकार है उसे मिलकर रहेगा लेकिन सही समय आने पर.उधर कर्ण भी लाक्षागृह षडयंत्र के बारे में सोचकर शकुनि के ऊपर क्रोधित है तभी दुर्योधन वहां आकर उससे उसके क्रोध का कारण पूछता है.

इसके साथ ही कर्ण उसे बताता है लाक्षागृह का षडयंत्र रचकर शकुनि मामा ने कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा और ये बात पांडव भली भांति जानते हैं. अब दुर्योधन ये जानने की कोशिश में लगा है कि आखिर पांडव और कुंती वारणावत में बच कैसे गए. शकुनि उस सेनापति को बुलाते हैं जो उस रात लाक्षागृह के बाहर पहरा दे रहा था और उसे ज़हर देकर मृत्यु दंड देता है| उधर काम्पिल्य नगरी में विदुर धृतराष्ट्र के दूत बनकर पहुंच गए हैं पांचों पांडव के लिए हस्तिनापुर वापस आने का समाचार लेकर. युधिष्टर अपने काका विदुर से मिलने की आज्ञा लेता है लेकिन कृष्ण उन्हें रोकते हुए कहते हैं," नहीं युवराज, आज वे आपके काका श्री नहीं हैं. आज वो हस्तिनापुर नरेश के दूत बनकर आये हैं, इसलिए उचित यही होगा कि सबके सामने मिला जाए. ताकि सब सुन सकें कि उन्होंने क्या कहा और तुमने क्या उत्तर दिया. ये गलतफहमियों से बचने के दिन हैं युवराज."हस्तिनापुर में गांधारी धृतराष्ट्र के पास आती है, और पांडवों के जीवित होने का समाचार जानकर अपनी खुशी व्यक्त करती है. 

आपकी जानकारी के लिए बता दें की धृतराष्ट्र भी गांधारी को अपनी प्रसन्नता दिखाता है और अपनी चिंता का विषय भी बताता है कि पुत्रमोह के चलते कहीं पांडवों के साथ कोई अन्याय न हो जाये. शकुनि भी अपने चौसर का पासा फेंककर नया षडयंत्र रच रहा है और दुर्योधन के सामने विदुर पर पक्षपाती का आरोप लगाते हुए कहता है कि,"पता नहीं वो दासी पुत्र काम्पिल्य नगरी में कैसे कैसे जाल फैला रहा होगा."इधर काम्पिल्य नगरी में कुंती विदुर से मिलने आती हैं और अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहती हैं कि विदुर पांडवों को हस्तिनापुर ले जाने के लिए क्यों आये हैं. तभी विदुर हस्तिनापुर की वर्तमान स्तिथि के बारे में बताते हैं और कहते हैं कि पांडव हस्तिनापुर की आत्मा हैं और उनका वहां जाना जरूरी है. विदुर महाराज द्रुपद से मिलते हैं, और साथ ही कुलवधू द्रौपदी के लिए हस्तिनापुर महाराज द्वारा भेजे गए उपहार भी भेंट करते हैं. उपहार के साथ वो पांडवों और गृहलक्ष्मी द्रौपदी को हस्तिनापुर ले जाने का आग्रह भी करते हैं. द्रुपद खुशी-खुशी अपनी बेटी द्रौपदी और पांचों पांडव को विदा करने का निर्णय लेते हैं, साथ ही द्रौपदी के ससुरालवालों से मिलने के बहाने श्री कृष्ण और बलराम भी हस्तिनापुर आने का निर्णय लेते हैं.

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