कूलर कारोबारियों की बढ़ी चिंता, लॉकडाउन के वजह से ठप पड़ी डेढ़ लाख कूलर की बिक्री

देशभर में बढ़ते कोरोना संक्रमण की वजह से लॉकडाउन की स्थिति को और बढ़ा दिया गया था. इस लॉकडाउन की वजह से हर काम ठप पड़ा हुआ है. छोटे उद्योग से लेकर बड़े उद्योग के व्यापारियों को भारी भरकम नुकसान झेलना पड़ रहा है. वहीं, इंदौर में 3 मई के बाद लॉकडाउन बढ़ाए जाने की संभावनाओं ने शहर के कूलर निर्माता और विक्रेताओं की चिंता बढ़ा दी है. कूलर के कारोबारियों की माने तो कोरोना संक्रमण के चलते इस साल का अब तक का 75 फीसदी व्यवसाय प्रभावित हो चुका है. अगर 3 मई के बाद भी शहर में लॉकडाउन नहीं खुला तो शेष बचा 25 फीसदी कारोबार भी चौपट हो जाएगा. इसके चलते इस सीजन के शेष बचे 15-20 दिनों के लिए शासन-प्रशासन को विक्रय की अनुमति प्रदान करनी चाहिए ताकि इससे जुड़े लोगों को बेरोजगारी की मार न झेलनी पड़े.

इस बारें में कूलर निर्माता मुकेश यादव का कहना है कि इंदौर जिले में करीब 35 कूलर निर्माता हैं, जो छह से 10 हजार कूलर का निर्माण हर साल करते हैं. इस साल करीब डेढ़ लाख कूलर का निर्माण किया गया. इनकी औसत कीमत करीब 60 करोड़ रुपए है. इनमें नामी कंपनियां शामिल नहीं हैं. ये कूलर अभी फैक्ट्रियों और दुकान में फंसे हुए हैं. मार्च में कुल विक्रय की 25 फीसदी, अप्रैल में 50 और मई के अंतिम 15-20 दिनों में 25 फीसदी बिक्री होती है.

बता दें की तमाम निर्माताओं ने मार्च में कूलर तैयार कर लिए थे और ऑर्डर के अनुसार माल सप्लाई करना था, लेकिन कोरोना वायरस के चलते लॉकडाउन का एलान हो गया और सारे कूलर गोदाम में कैद होकर रह गए.  

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