100 किलो फूलो के साथ हुआ राम-सीता का स्वयंवर

रामायण के कई रूप दर्शकों ने देखे हैं. कई लोगों ने इस महागाथा को छोटे पर्दे पर जीवित करने की कोशिश की है. परन्तु हर कोई सफल रहा हो ये जरूरी नहीं. सिर्फ रामानंद सागर की रामायण और आनंद सागर की रामायण ने दर्शकों के दिल में अलग जगह बनाई थी. इसके साथ ही गुरमीत चौधरी को बतौर राम और देबीना बनर्जी को बतौर सीता काफी लोकप्रियता मिली थी.रामायण का वैसे तो हर दृश्य अद्भुत और खूबसूरत होता है, परन्तु राम-सीता का स्वयंवर देख हर कोई भाव विभोर हो जाता है. वहीं उस दृश्य को आंखों के सामने जीवित किया था रामानंद सागर और आनंद सागर ने. अब रामानंद सागर की रामायण के बारे में तो सभी को काफी कुछ पता है, परन्तु आनंद सागर की रामायण बनाने में भी खास तैयारी लगी थी.आनंद सागर की रामायण में राम सीता स्वयंवर को भव्य बनाने के लिए काफी मेहनत की गई थी. 

इसके साथ ही स्वयंवर के समय जिन पुष्पों का इस्तेमाल किया गया था उन्हें लाने की प्रक्रिया एक दम अलग और हैरान करने वाली थी. सिर्फ राम-सीता स्वयंवर के लिए 100 किलो फूलों का इस्तेमाल किया गया था. वहीं रामायण की शूटिंग बड़ौदा में जरूर की गई थी लेकिन स्वयंवर में इस्तेमाल होने वाले फूलों को मुंबई से लाया गया था, वो भी हवाई जहाज के जरिए. जी हां,  जितने दिनों तक राम-सीता स्वयंवर की शूटिंग चली, उतने दिनों तक रोजाना बड़ौदा से मुंबई का सफर तय किया जाता था. वहीं 100x100 मीटर का एक स्पेशल सेट भी सिर्फ इस सीन के लिए तैयार किया गया था.इस अनुभव के बारे में रामायण के क्रिएटिव डायरेक्टर शहाब शम्सी कहते हैं- मानव इतिहास में राम-सीता स्वयंवर को सबसे खूबसूरत पल माना जाता है. इस सीन को बड़ौदा में तब शूट किया गया था जब तापमान 42 डिग्री था. वहीं उस समय AC की भी सुविधा नहीं थी. वहीं तेज गर्मी के चलते फूल भी जल्दी खराब हो रहे थे.

वहीं अब ऐसे में रामायण के मेकर्स के लिए ये बड़ी चुनौती बन गया था. उन्हें राम सीता के स्वयंवर को भव्य भी रखना था और वास्तविकता के करीब भी. वहीं ऐसे में ये फैसला लिया गया कि फूलों को रोजाना मुंबई से फ्लाइट के जरिए लाया जाएगा. इस बारे में शहाब शम्सी कहते हैं- मैं रोज 10 किलो गुलाब और मोगरा लेकर मुंबई से बड़ौदा का सफर तय करता था. राम-सीता की वरमाला भी मैं मुंबई से ही लाया था. वहीं शम्सी के अनुसार क्योंकि उन्होंने मुंबई से बड़ौदा के बीच इतनी बार सफर किया, इसलिए दोनों एयरपोर्ट के सुरक्षाकर्मी उन्हें अच्छी तरह पहचान गए थे. उनकी मानें तो पहले वो सुरक्षाकर्मी भी ये देख हैरान रह जाते थे कि इतने फूलों का क्या किया जाएगा. परन्तु उन्होंने जब राम-सीता के स्वयंवर की बात बताई, हर किसी ने इसका स्वागत किया. शम्सी इसे श्रीराम की ताकत ही मानते हैं. वो कहते हैं- आरंभ से अंत तक, केवल राम, जय श्री राम.

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