यदि संसद में पेश किया गया इलेक्ट्रिसिटी विधेयक तो प्रदर्शन करेंगे बिजली कर्मचारी

सोनभद्र: ओबरा बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की राष्ट्रीय समन्वय समिति ने सोमवार को मिलकर एक बहुत ही खास निर्णय किया है. यदि सेंट्रल गवर्नमेंट संसद के शीतकालीन सत्र में बिजली संशोधन बिल 2021 को पेश करने का प्रयास करती है तो देश भर में 15 लाख बिजली कर्मचारी और इंजीनियर काम छोड़कर विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर देंगे. साथ ही यह भी आह्वान किया है कि बिजली कर्मचारी संसद में बिल को पेश करने और पारित कराने की सेंट्रल गवर्नमेंट के एकतरफा प्रयास के विरुद्ध उसी क्षण लाइटनिग जांच के लिए सतर्क और तैयार रहें.

केंद्र की होगी जिम्मेदारी: आल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे ने बोला है कि यह विरोध प्रदर्शन अब तक की सर्वाधिक भागीदारी वाला प्रदर्शन होने वाला है. जिसके परिणामों की जिम्मेदारी सेंट्रल गवर्नमेंट की होगी. संगठन के सभी घटक अपने सदस्यों की यथासंभव अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने वाले है. दिन भर चलने वाले प्रदर्शन में व्यापक भागीदारी के परिणाम की जिम्मेदारी इंडिया गवर्नमेंट को ही वहन करना पड़ेगा.

उन्होंने बोला है कि बिजलीकर्मी निरंतर आंदोलनरत हैं. ऐसे में अगर बिजलीकर्मी हड़ताल पर जाते है तो प्रदेशभर में बिजली का संकट और भी ज्यादा बढ़ सकता है. आम जनता को इसका खामियाजा भुगतना  पड़ सकता है. वही बिजली विभाग से जुड़े संयुक्त संघर्ष समिति के सचिव अदालत ने बोला है कि सरकार को इस तरह की गलती नही करनी चाहिए. बिजली विभाग का हम निजीकरण नही होने देंगे. सरकार प्रत्येक स्थान पर निजीकरण करने में लगी है. सरकारी क्षेत्र में ही सैकड़ों विभागों में हमारा लाखो करोड़ बाकी है पर उसकी भरपाई सरकारी विभागों से नही हो पा रही है. अपनी गलती कर्मचारियों पर ना थोपें सरकार. ये चेतावनी है कि बिजली संसोधन बिल संसद में पेश ना करें अन्यथा पड़े परिणाम भोगने पड़ सकते है.

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