मेड इन चाइना को बहिष्कार करने का नारा देने के बाद, तेजी से बढ़ा चीनी उत्पादों का आयात

Dec 08 2018 09:30 PM
मेड इन चाइना को बहिष्कार करने का नारा देने के बाद, तेजी से बढ़ा चीनी उत्पादों का आयात

 नई दिल्ली: अपने देश में देशभक्ति साबित करने का सबसे बड़ा पैमाना यह है कि कितने कड़क तरीके के आप देशभक्ति के नारे लगा लेते हैं,  सोशल मीडिया में, अपने भाषणों में जितना चिल्लाकर नारा लगाएंगे, उतने बड़े देश भक्त हो जाएंगे और सबसे सदाबहार तो ये है कि पाकिस्तान को गालियां दो. 

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एक नेता के अनुसार जिस तरह सर्जिकल स्ट्राइक द्वारा पाकिस्तान को मजा चखाया गया, उसी तरह चीन के खिलाफ भी आर्थिक सर्जिकल स्ट्राइक की जरूरत है. इस स्लोगन के बाद ‘देशभक्तों’ ने कई सारे कैंपेन चलाए, जिसमें मेड इन चाइना को बॉयकॉट करने का प्रण लिया गया. इस मुहिम को बीजेपी और आरएसएस ने और हवा दे दी,  खूब हो हंगामा हुआ और जमकर प्रचार भी किया गया. लेकिन कमाल है कि उसके बाद से चीन के सामानों की आवाजाही में और अधिक तेजी से वृद्धि हुई है.  इस बात कि पुष्टि करते हैं, डायरेक्टर जनरल ऑफ फॉरन ट्रेड के वेबसाइट पर मौजूद आंकड़े, जहाँ आप खुद आप इसे देख सकते हैं. चूंकि 2014 के बाद से अट्रा नेशनलिस्ट की एक नई कैटेगरी बनाई गई है, इसलिए चीन से हमारे व्यापार का आंकड़ा उसके बाद से ही देख सकते हैं, 2013-14 में हमारे कुल आयात का करीब 11% चीन से आया था, यही आंकड़ा  2017-18 में यह 16% से भी अधिक हो गया है.

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इसका सीधा मतलब यह निकलता है कि दुनिया के किसी भी इलाके से जिस रफ्तार से हम सामान आयत कर रहे हैं, उससे कहीं ज्यादा रफ्तार से हम चीन से आयत कर रहे हैं. खयाल रहे कि चीन से हम ना तो सोना लेते हैं और या ना ही क्रूड. ये दोनों हमारे इंपोर्ट बास्केट का सबसे बड़ा हिस्सा रहे हैं. ऐसे में अगर हमारे कुल इंपोर्ट का 16% से अधिक चीन से ही आ रहा है तो इसका मतलब हुआ कि गोल्ड और कच्चे तेल के अलावा हम जो भी आयत करते हैं, वो या तो पूरी तरह से चीन से ही आता है या फिर बहुत बड़ा हिस्सा चीन से आता है.

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