गैंग रैप के इल्जाम निकला झूठा तो कोर्ट में अपने बयानों में फसी महिला

ओडिशा में गैंगरेप के इल्जाम को फर्जी पाने के उपरांत कोर्ट ने सभी चार आरोपियों को छोड़ा जा चुका है. स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट ने इल्जाम लगाने वाली महिला के विरुद्ध पुलिस को FIR दर्ज करने  का आदेश जारी कर दिया है. घटना मई 2020 की है. तब महिला की शिकायत पर फूलबनी जिले के सदर थाने में केस दर्ज  किया जा चुका था. कोर्ट ने पाया गया कि महिला ने कई बार अपने बयान में परिवर्तन. प्राथमिकी दर्ज करने के दौरान और धारा 164 के बीच जो बयान दर्ज  किया जा चुका है, उसमें विरोधाभास था. 

सुनवाई के दौरान महिला ने कोर्ट को कहा है कि उसके साथ गैंगरेप नहीं हुआ है. कोर्ट रूम में महिला के ताजा बयान और पूरे केस की कार्रवाई करने पर फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट के जज ने चारों आरोपियों को निर्दोष करार देते हुए रिहा करने का फैसला किया गया था. साथ ही झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए महिला के विरुद्ध आईपीसी की धारा 193 के अंतर्गत प्राथमिकी दर्ज करने का भी आदेश जारी कर दिया है. जिसके अतिरिक्त पीड़िता के लिए वित्तीय सहायता के रूप में मिलने वाली रकम को भी देने रोका जा चुका है.  

बचाव पक्ष के वकील बिजय पटनायक ने  मीडिया से उन्होंने कहा है कि मई 2020 में हुई घटना के बाद CRPC की धारा 164 के अंतर्गत बयान दर्ज कराने और मेडिकल के बाद फूलबनी पुलिस ने चार आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट फाइल की जा चुकी है. सुनवाई के बीच कोर्ट ने महसूस किया कि महिला ने गैंगरेप का झूठा इल्जाम लगाया था. उधर, महिला के वकील बिजय मोहंती ने कहा है कि महिला ने खुद शिकायत नहीं लिखी थी. उसने केवल उस पर हस्ताक्षर कर दिए थे. मजिस्ट्रेट के सामने वह अपने पहले के बयान को याद नहीं कर पा रही थी. इसी आधार पर कोर्ट को उसके बयान में विरोधाभास लगा जिसके उपरांत चारों आरोपियों को रिहा करने का निर्देश जारी कर दिया है.  

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