वोडाफोन आईडिया के लिए 'संजीवनी' बना मोदी सरकार का ये फैसला, अब कंपनी नहीं बेचेगी अपनी सम्पत्तियाँ

नई दिल्ली: पिछले हफ्ते दूरसंचार क्षेत्र (Telecom Sector) के लिए घोषित सरकारी राहत उपायों ने वोडाफोन आइडिया लिमिटेड को संजीवनी देने का काम किया है। कंपनी अब न केवल बाजार में टिके रहने को लेकर आश्वस्त है, बल्कि वह अपनी संपत्तियां बेचने की योजना निरस्त करने पर भी विचार कर रही है। वोडाफोन आइडिया लिमिटेड (Vi) के MD एवं CEO रविंदर ठक्कर ने 22 सितंबर को एक साक्षात्कार में कंपनी की योजनाओं के बारे में जानकारी दी।

रविंदर ठक्कर ने कहा कि कंपनी अब धन जुटाने की अपनी योजनाओं की समीक्षा करेगी। संपत्तियां बेचने की योजना को अब रद्द किया जा सकता है। हम अन्य तरीकों से पैसे जुटाकर बाजार में अन्य कंपनियों का मुकाबला करेंगे। बता दें कि, सरकार ने पिछले हफ्ते 16 सितंबर को दूरसंचार क्षेत्र के लिए कुछ राहत उपायों का ऐलान किया था। इन उपायों ने खस्ताहाल दूरसंचार क्षेत्र के लिए संजीवनी का काम किया। कंपनियों को रेगुलेटरी बकाये भरने से चार वर्षों का समय दिया गया। इसके साथ ही ऑटोमैटिक रूट से 100 फीसद FDI को मंजूरी मिली और AGR को नए सिरे से परिभाषित किया गया।

बता दें कि वोडाफोन आइडिया के बोर्ड ने हाल ही 25,000 करोड़ रुपये तक जुटाने को स्वीकृति दी थी, किन्तु कंपनी अब तक किसी भी निवेशक के नाम को अंतिम रूप नहीं दे पाई है। इससे पहले, कंपनी के प्रमोटर्स आदित्य बिड़ला समूह और वोडाफोन ने नया निवेश करने से इंकार कर दिया था। सरकार की ओर से दूरसंचार क्षेत्र में सुधारों को आगे बढ़ाने के ऐलान के बाद दोनों प्रमोटर्स ने अभी अपने रुख जाहिर नहीं किए हैं।

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