सरपंच से सीएम की कुर्सी तक पहुंचे विलासराव देशमुख का आज जन्मदिन

सरपंच से सीएम की कुर्सी तक पहुंचे जमीनी नेता विलासराव देशमुख का आज जन्म दिवस है. महाराष्‍ट्र में कांग्रेस के सबसे कद्दावर नेताओं कांग्रेस के सबसे अहम सिपहसलार थे. महाराष्‍ट्र के लातूर में जन्‍मे देशमुख ने पंचायत से अपने राजनीतिक कॅरियर की शुरुआत की और राष्‍ट्रीय राजनीति तक अपनी पहुंच बनाई. महाराष्‍ट्र में कांग्रेस में उनका कद सबसे बड़ा रहा. दरअसल इसकी वजह महाराष्ट्र के लगभग सभी बिजनेस घरानों से विलासराव देशमुख का मधुर संबंध रहा. विलासराव देशमुख का जन्म 26 मई 1945 को लातूर जिले के बाभालगांव के एक मराठा परिवार में हुआ था. उन्होंने पुणे विश्वविद्यालय से विज्ञान और ऑर्ट्स दोनों में स्नातक की पढ़ाई की है. पुणे के ही इंडियन लॉ सोसाइटी लॉ कॉलेज से उन्होंने कानून की पढ़ाई की. विलासराव ने युवावस्था में ही समाजसेवा करना शुरू कर दिया था. उन्होंने सूखा राहत कार्य में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया.

विलासराव देशमुख और उनकी पत्नी वैशाली देशमुख को तीन बेटे हैं. अमित देशमुख, रितेश देशमुख और धीरज देशमुख. अमित देशमुख लातूर से विधायक हैं. जबकि रितेश देशमुख जानेमाने बॉलीवुड कलाकार हैं. विलासराव देशमुख ने पंचायत से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की और पहले पंच और फिर सरपंच बने. इसके बाद विलासराव देशमुख ने राज्य की राजनीति में कदम रखा और 1980 से 1995 तक लगातार तीन चुनावों में विधानसभा के लिए चुने गए और विभिन्न मंत्रालयों में बतौर मंत्री कार्यरत रहे. इस दौरान उन्होंने गृह, ग्रामीण विकास, कृषि, मतस्य, पर्यटन, उद्योग, परिवहन, शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, युवा मामले, खेल समेत अनेक पदों पर मंत्री के रूप में कार्य किया. विलासराव देशमुख का जन्मस्थल लातूर है और यही उनका चुनावी क्षेत्र भी रहा. राजनीति में आने के बाद से उन्होंने लातूर का नक्शा ही बदल दिया.


1995 में विलासराव देशमुख चुनाव हार गए लेकिन 1999 के चुनावों में उनकी विधानसभा में फिर से वापसी हुई और वो पहली बार राज्य के मुख्यमंत्री बने. लेकिन उन्हें बीच में ही मुख्यमंत्री की गद्दी छोड़नी पड़ी और सुशील कुमार शिंदे को उनकी जगह मुख्यमंत्री बनाया गया. लेकिन अगले चुनावों में मिली अपार सफलता के बाद कांग्रेस ने उन्हें एक बार फिर मुख्यमंत्री बनाया. पहली बार विलासराव देशमुख 18 अक्टूबर 1999 से 16 जनवरी 2003 तक मुख्यमंत्री रहे जबकि दूसरी बार का कार्यकाल 7 सितंबर 2004 से 5 दिसंबर 2008 तक रहा. मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख के दूसरे कार्यकाल के दौरान मुंबई सीरियल ब्लास्ट हुआ. धमाकों की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया. इसके बाद उन्होंने केंद्रीय राजनीति का रुख किया और राज्यसभा के सदस्य बने. उन्हें केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह दी गई और उन्होंने भारी उद्योग व सार्वजनिक उद्यम मंत्री, पंचायती राज मंत्री, ग्रामीण विकास मंत्री, विज्ञान और तकनीक मंत्री के साथ ही भू-विज्ञान मंत्री के पद पर काम किया. इसके साथ ही विलासराव देशमुख मुंबई क्रिकेट एशोसिएशन के अध्यक्ष भी रहे. 14 अगस्त 2012 को उनका निधन ही गया.

 

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