क्या बीजेपी का साथ छोड़ देंगे वरुण गांधी...?

नई दिल्ली: BJP और केन्द्र गवर्नमेंट के कुछ मंत्रियों के सलाहकारों के मध्य में कृषकों के मुद्दे पर दो चर्चाएं की जा रही है। पहली तो यह कि पीएम मोदी ने केन्द्र गवर्नमेंट के विरुद्ध आंदोलन के द्वारा चलाए जा रहे विरोधियों के एक और अभियान को पूरी तरह से रद्द कर रहा है। दूसरा टूलकिट फेल हो गया और रास्ता शुरू हो चुका है। मोदी सरकार ने जीत हासिल कर ली। दूसरी चर्चा वरुण गांधी को लेकर कई तरह से बातें की जा रही है। कई का कहना है कि मेनका गांधी और वरुण गांधी के बीजेपी  में दिन लद गए हैं। कोई तंज भरे लहजे में कहता है कि BJP भला गांधियों (वरुण और मेनका) को क्यों ढोए और यूपी के नेता ने तो प्रश्न करते हुए बोला कि  यूपी विधानसभा चुनाव से पहले हमेशा वरुण गांधी आक्रामक हो जाते हैं, 2017 में भी हुए थे।  जहां अब यह प्रश्न उठाया जा रहा है कि क्या वरुण गांधी इस बार कोई बड़ा फैसला लेने वाले हैं?

पिछले चुनाव के दौरान भी तीखे थे वरुण के तेवर: मिली जानकारी के अनुसार 2017 में प्रस्तावित विधानसभा चुनाव से बहुत पहले वरुण गांधी यूपी की राजनीति में अचानक बहुत ही ज्यादा एक्टिव रहते है। 2016 में प्रयागराज (इलाहाबाद) में पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी ही चुकी है। जिसमें वरुण गांधी के पोस्टरों से शहर का कोना-कोना रुक गया है। वरुण गांधी के समर्थकों ने अपनी ताकत दिखाने की कोशिश कर रहे है।यहां  2017 के विधानसभा चुनाव के पहले राजनीति और मीडिया में कयास लगाए जा रहे थे कि वरुण गांधी भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आ सकते हैं। तब वह सुल्तानपुर से सांसद थे। वरुण भी ऐसे सवालों को सुनकर मुस्कराते हुए टाल रहे है। जहां यह भी कहा जा रहा है कि वरुण को कांग्रेस में लाने के लिए प्रियंका गांधी वाड्रा और उनकी टीम प्रयास में लगे हुए हैं। यह आवश्यक है कि 2017 से आज तक बीजेपी  और सेंट्रल गवर्नमेंट में वरुण गांधी को उनके अनुभव और कद को देखते हुए पद, प्रतिष्ठा या मान सम्मान उसके अनुरुप सामने नहीं आया है। उनकी मां और पूर्व केन्द्रीय मंत्री मेनका गांधी को भी 2019 चुनाव के उपरांत से कैबिनेट में जगह नहीं दी गई।

क्या भाजपा छोड़ देंगे वरुण गांधी?: हम बता दें कि वरुण गांधी इस बारे में अभी कुछ भी खुलकर अपनी बात को कह नहीं पा रहे है। मीडिया से खुद को दूर ही रख रहे हैं, लेकिन कांग्रेस के कुछ नेता इस तरह की संभावनाओं से अवश्य ही  उत्साहित हैं। उमेश पंडित जैसे युवा नेता का कहना है कि वरुण को तो बिना समय गंवाए बीजेपी छोड़कर कांग्रेस से साथ काम करना शुरू कर दिया है। वरुण के पिता संजय गांधी द्वारा कांग्रेस में लाए कुछ नेता अब बूढ़े हो रहे हैं। कांग्रेस के कद्दावर नेताओं में आने वाले एक पूर्व केन्द्रीय मंत्री का बोलना है कि समझदारी से राजनीति करने की इच्छा शक्ति लेकर वरुण को कांग्रेस में शामिल होने की कोशिश करना चाहिए।  जहां इस बारें में आगे कहा गया है कि यह एक संवेदनशील मसला है और बिना कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की सहमति के यह संभव नहीं है। यह बहुत आसान निर्णय भी नहीं है। वह कहते हैं कि इसे वरुण गांधी और मेनका भी अच्छी तरह समझ गए हैं। हालांकि, राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं हो सकता। लेकिन कांग्रेस मुख्यालय से लेकर कांग्रेस के मीडिया प्रभारी रणदीप सुरजेवाला की टीम भी इसे लेकर खास प्रतिक्रिया नहीं देते।

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