पिता कुश्ती में बढ़ना चाहते थे आगे लेकिन आर्थिक हालात के कारण रह गए पीछे, अब बेटे ने पूरा किया सपना

आज यानी बुधवार को टोक्यो ओलंपिक में हरियाणा का दमखम नजर आया। भारतीय पहलवान रवि दहिया ने टोक्यो ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन करते हुए फाइनल में स्थान बना लिया है। उन्होंने 57 किलो श्रेणी के सेमीफाइनल में कजाकिस्तान के सनायेव नूरिस्लाम को पराजित दिया है। रवि दहिया ने इसके साथ-साथ टोक्यो ओलंपिक में भारत के लिए चौथा पदक पक्का कर लिया है। अब वे फाइनल में स्वर्ण पदक जीतने की मंशा से उतरेंगे। 

वही रवि के पिता राकेश कुमार आर्थिक हालात मजबूत न होने की वजह से कुश्ती में आगे नहीं बढ़ सके थे, मगर अपने बेटे को वे इंटरनेशनल लेवल पर देश के लिए स्वर्णिम प्रदर्शन करते देखना चाहते हैं। बुधवार को रवि ने पिता के ख्वाब को पूरा कर दिखाया। राकेश स्वयं भी कुश्ती करते थे तथा आगे बढ़ना चाहते थे मगर गुजर-बसर के लिए खेती में जुट गए। सोनीपत के गांव नाहरी के मूल रहवासी रवि को उनके पिता गांव के संत हंसराज पहलवानी के लिए लेकर गए थे। गांव के ही अखाड़े में उन्होंने रवि को कुश्ती के दांव-पेंच सिखाने आरम्भ किए। कुछ वक़्त पश्चात् दस साल की उम्र में ही रवि को छत्रसाल स्टेडियम भेजा गया। उन्होंने साल 2015 में जूनियर रेसलिंग वर्ल्ड चैंपियनशिप में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए रजत पदक जीता। 
 
वही घुटने की चोट की वजह से 2017 में सीनियर नेशनल गेम्स में सेमीफाइनल तक पहुंचकर भी उन्हें प्रतियोगिता से बाहर होना पड़ा। कुछ वक़्त पश्चात् ही फिट होकर उन्होंने फिर से अभ्यास आरम्भ किया। 2018 में वर्ल्ड कुश्ती चैंपियनशिप में उन्होंने रजत पदक जीता तथा 2019 में हुई वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीता। अब रवि के पिता राकेश ने अपने छोटे पुत्र पंकज को भी कुश्ती में उतारा है। वे चाहते हैं कि रवि की तरह पंकज भी नाम कमाए। उन्होंने बताया कि दोनों बेटों को पहलवानी में आगे बढ़ाने के लिए वे खेतों में बहुत मेहनत करते हैं। 

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