भारत ने दी मंजूरी, देश में कैम्पस खोलेगी विदेशी यूनिवर्सिटी

कोरोना महामारी के कारण देश के प्रत्येक वर्ग को बेहद प्रभाव पड़ा है. वही वैश्विक महामारी COVID-19 के चलते नई शिक्षा नीति के तहत देश ने अब विदेशी विश्वविद्यालयों के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं. विश्व के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय अब देश में अपने कैम्पस खोल सकेंगे. इससे प्रतिभा पलायन को रोकने सहायता मिलने के साथ ही देश की अर्थव्यवस्था को भी खासी बढ़त मिलेगी. पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई मंत्रीमंडल बैठक में 34 वर्ष पश्चात् नई शिक्षा नीति की घोषणा के तहत यह निर्णय लिया गया है.

बुधवार को हायर एजुकेशन सेक्रेटरी अमित खरे ने संवाददाताओं को बताया कि सरकार दुनिया के सर्वोच्च रैंक वाले विश्वविद्यालयों को देश में अपने कैंपस खोलने का मौका देगी. बताया जाता है कि सरकार के इस निर्णय के पीछे यह तथ्य भी कार्य कर रहा है, कि प्रत्येक वर्ष साढ़े सात लाख छात्र विदेश पढ़ने जाते हैं. ऐसा करने के लिए वह विदेश में अरबों डॉलर की मोटी राशि खर्च करते हैं.

हालांकि इस निर्णय के आलोचकों का यह भी कहना है कि सर्वोच्च श्रेणी के विश्वविद्यालय देश में अपने परिसर क्यों खोलना चाहेंगे, जब भारत सरकार ने अपनी नई शिक्षा नीति के तहत फीस की अधिकतम सीमा निश्चित कर दी है. मतलब अब विश्वविद्यालय मुंह मांगी राशि नहीं बटोर सकेंगे. उल्लेखनीय है कि देश के वामपंथी नेताओं सहित प्रधानमंत्री मोदी भी पूर्ववर्ती सरकारों के विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में मंजूरी देने की कोशिशों का विरोध करते रहे हैं. किन्तु अब हालात बदल गए हैं. इसी के साथ कई परिवर्तन किये गए है शिक्षा नीतियों में, 35 वर्षो पश्चात् ये अहम निर्णय लिया गया है.

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