केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर का बड़ा बयान, कहा-34 वर्ष पश्चात् शिक्षा नीति में किए गए परिवर्तन

सेंट्रल मिनिस्टर प्रकाश जावड़ेकर ने अपने बयान में कहा, पीएम नरेंद्र मोदी जी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक में 21वीं सदी की नई शिक्षा नीति को अनुमति दी गई. यह बहुत आवश्यक है क्योंकि 34 वर्षो से शिक्षा नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ था. मुझे उम्मीद है कि देशवासी इसका स्वागत करेंगे. इस अवसर पर सेंट्रल मिनिस्टर रमेश पोखरियाल निशंक और उच्च शिक्षा सचिव अमित खरे भी मौजूद रहे. 

भारत सरकार के मुताबिक, मंत्रीमंडल ने नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 को अनुमति दी. उच्च शिक्षा में प्रमुख सुधारों में 2035 तक 50 फीसद सकल नामांकन अनुपात का उद्देश्य रखा गया है. इसमें एकाधिक प्रवेश/ निकास का प्रावधान सम्मिलित है. हायर एजुकेशन सेक्रेटरी अमित खरे ने कहा कि हायर एजुकेशन में कई सुधार किए गए हैं. सुधारों में ग्रेडेड अकैडमिक, प्रशासनिक और वित्‍तीय स्‍वायत्त्‍तता आदि सम्मिलित है. नई शिक्षा नीति और सुधारों के पश्चात् हम 2035 तक 50 फीसद ग्रॉस एनरोलमेंट रेश्यो प्राप्त करेंगे. 

साथ ही भारत सरकार के मुताबिक, नई शिक्षा नीति में सभी हायर एजुकेशन के लिए एक एकल नियामक गठन किया जाएगा. कई 'निरीक्षणों' की जगह पर अनुमोदन के लिए स्व प्रकटीकरण आधारित पारदर्शी प्रणाली के तहत कार्य करना सम्मिलित है. क्षेत्रीय भाषाओं में ई-कोर्स आरम्भ किए जाएंगे. वर्चुअल लैब्स डेवेलप किए जाएंगे. एक राष्ट्रीय शैक्षिक वैज्ञानिक मंच आरम्भ किया जाएगा. देश में 45,000 कॉलेज हैं. ग्रेडेड स्वायत्तता के तहत कॉलेजों को शैक्षणिक, प्रशासनिक और वित्तीय स्वायत्तता दी जाएगी. आगे बताते हुए अमित खरे ने कहा कि नए सुधारों में टेक्नोलॉजी और ऑनलाइन शिक्षा पर जोर दिया गया है. अभी हमारे यहां डीम्ड यूनविर्सिटी, सेंट्रल यूनिवर्सिटीज और स्टैंडअलोन इंस्टिट्यूशंस के लिए भिन्न-भिन्न नियम हैं. नई एजुकेशन पॉलिसी के तहते सभी के लिए नियम बराबर होंगे. 

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