दार्जलिंग के बागानों के लिए संकट बनी नेपाल की चाय, जानिए क्या है वजह

कोलकाता: नेपाल से मुक्त व्यापार अनुबंध के तहत आयातित चाय की पत्तियों को भारतीय बाजारों में दार्जिलिंग चाय के रूप में बेचा जा रहा है. इसी बीच कुछ उत्पादकों ने यह भी आरोप लगाते हुए कहा कि नेपाल जानबूझकर भारतीय बाजारों में चीन से आयातित ‘घटिया चाय’ भेज रहा है. जिसके बाद पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग जिले के चाय उत्पादकों ने अब चाय बोर्ड के साथ ही राज्य की सीएम ममता बनर्जी को भी पत्र लिखा है. नेपाल से चाय की बढ़ती आवक और उपलब्धता ने प्रतिष्ठित दार्जिलिंग चाय की कीमतों पर सीधा प्रभाव डाला है.

एक साल के दौरान इसकी कीमतों में 20 से 25 फीसद तक की गिरावट दर्ज की गई है. उद्योग से संबंधित लोगों का आरोप है कि खास तौर पर व्यापारियों का एक तबका नेपाल की चाय को दार्जिलिंग चाय के तौर पर बेच रहा है. कानूनी तौर पर मुक्त व्यापार समझौते के तहत भारत में कोई भी नेपाल से स्वतंत्र रूप से चाय का इम्पोर्ट कर सकता है. हालांकि थोक बिक्री में दार्जिलिंग चाय का दाम प्रति किलोग्राम औसतन 320 से 360 रुपये के बीच रहता है. किन्तु नेपाल की परंपरागत किस्म वाली चाय का भाव इसके आधे से भी कम होता है.

दार्जिलिंग में बागान चलाने वाली एक चाय कंपनी के एक अधिकारी कहते हैं कि, ‘उपभोक्ता के लिए यह समझना संभव नहीं होता कि वह नेपाल की चाय पी रहा है या दार्जिलिंग की. इन दोनों का स्वाद और सुगंध बहुत हद तक एक जैसी होती है.’ उद्योग के सूत्रों का कहना है कि प्रति वर्ष लगभग 1.6 करोड़ किलोग्राम नेपाली चाय भारत में आती है, जिसमें से तक़रीबन 30 से 40 लाख किलोग्राम चाय परंपरागत किस्म वाली होती है. चाय की यह वैरायटी दार्जिलिंग चाय की बिक्री को प्रभावित करती है. स्वाद, सुगंध और दिखने के लिहाज से नेपाल की खास तौर पर इलाम किस्म वाली चाय दार्जिलिंग चाय की एक विकल्प होती है.

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