पुलिस मुठभेड़ और कांबिंग ऑपरेशन के विरोध में आए माओवादी

उड़ीसा राज्य में सुरक्षाबलों के द्वारा चलाये जा रहे लगातार ऑपरेशन्स से नक्सलवादियों के खात्मे के साथ अब माओवासियों को भी खतरा महसूस होने लगा है. हाल ही में उड़ीसा के  उड़ीसा के कंधमाल और बलांगीर जिलों में चलाये गए अभियान में  सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच हुई अलग-अलग स्थानों पर हुई मुठभेड़ों में सुरक्षाबलों ने सात नक्सलियों को मार गिराने की खबर का असर अब माओवादियों पर दिखना शुरू हो गया है. 

बुधवार को माओवादियों ने कंधमाल जिला के कोटगड़ एवं मुनीगुड़ा में पेड़ काटकर पथावरोध करने का प्रयत्न किया जिससे कोटगड़ एवं मुनीगुड़ा के बीच यातायात तंत्र पूरी तरह से बाधित हो गया. साथ माओवादियों द्वारा बांशधारा घुमुसर एवं नागाबली माओ डिवीजन के नक्सलियों ने पोस्टर भी छोड़े हैं जिन पर नक्सलियों के मुठभेड़ में मारे जाने पर आक्रोश जताया गया और लिखा गया है कि - "कंधमाल के सुडुकुम्मा एवं बलांगीर जिला के बरकामाल में पुलिस की गोली से जान गंवाने वाले माओवादियों का रक्त कभी व्यर्थ नहीं जाएगा".

साथ ही इस घटना के लिए माओवादियों ने मोदी सरकार और नवीन पटनायक सरकार के खिलाफ आंदोलन बढ़ाने की चेतावनी देते हुए  पुलिसिया दमन की निंदा की है. घटना की सूचना मिलते ही कोटगड़ थाना पुलिस मौके पर पहुंची और पुलिस ने पोस्टर जब्त करने समेत रास्ते से पेड़ को हटवाकर यातायात बहाल करवाया.

उड़ीसा के कंधमाल और बलांगीर जिलों में सुरक्षाबलों ने 7 नक्सलियों को मार गिराया

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