कैंसर और गरीबी से मुक़ाबला हार रही कराटे चैंपियन

कराटे और ताइक्वांडों चैंपियन और ब्लैक बैल्ट 18 साल की लुधियाना की प्रियंका, पिछले साल मलेशिया में होने वाली इंटरनेशनल चैंपियनशिप में भाग लेने के लिए पूरी तरह तैयार थीं. लेकिन तभी उन्हें पता चला कि उन्हें ब्लड कैंसर है.

कराटे में राष्ट्रीय स्तर पर 4 गोल्ड मेडल और राज्य स्तर पर सात गोल्ड मेडल जीतने वाली प्रियंका अब ब्लड कैंसर और गरीबी से मुक़ाबला करने को मजबूर हैं. प्रियंका के परिवार में सात बहने हैं, प्रियंका दूसरे नंबर की हैं. प्रियंका के पिता शराबी हैं. मां प्रभावती देवी, एक फैक्टरी में पांच हजार रुपए महीना कमाती हैं. उनकी अधिकांश तन्ख्वाह प्रियंका के इलाज के लिए चली जाती है. उनके पास इतने पैसे भी नहीं हैं कि वे प्रियंका की रिच डाइट के लिए लिए फल और अंडे खरीद सकें. उनका प्रतिमाह दवाइयों का खर्चा 25 हजार रुपए है.

मां बताती हैं, “मुख्यमंत्री कैंसर रिलीफ फंड से हमें डेढ़ लाख रुपए मिले लेकिन सारा पैसा प्रियंका के इलाज पर खर्च हो गया. हम इस समय भारी ऋण में डूबे हुए हैं. डॉक्टरों ने उन्हें बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सलाह दी है. इसका खर्चा ही 20-25 लाख रुपए है. कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा.” प्रियंका हालत दिनों दिन खराब हो रही है. परिवार को दुखी और संघर्षरत देख प्रियंका ने थक कर कह दिया है कि अब मेरा इलाज बंद कर दो और मुझे नियति के सहारे छोड़ दो.

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