वो फिल्म जिसे बनाने में लग गई थी डायरेक्टर की 16 साल की कमाई

हिंदी सिनेमा में कुछ ऐसी फिल्मे बन जाती है जो इतिहास के रूप में जानी जाती है. अगर हम बात करे फिल्म मुगल-ए-आज़म की ही तो ये फिल्म आज भी दर्शक बड़े उत्साह से देखते है. इस फिल्म के डायरेक्टर है करीमुद्दीन आसिफ. करीमुद्दीन आसिफ ने अपने करियर में बतौर निर्देशक सिर्फ 3 ही फिल्मे बनाई है जिनमे से मुग़ल-ए-आज़म एक है. इस फिल्म ने आसिफ को हिंदी सिनेमा जगत में अलग ही पहचान दिलाई थी. आसिफ सलीम-अनारकली कि मोहोब्बत के दीवाने थे इसलिए उन्होंने ये फिल्म बनाई थी. 

फिल्म पृष्ठभूमि के इतिहास में तो मुगल-ए-आज़म का नाम हमेशा के लिए आ चुका है. मुगल-ए-आज़म के लिए तो करीमुद्दीन आसिफ की खूब तारीफ भी की गई थी. इस फिल्म को बनाने में करीमुद्दीन आसिफ ने खूब मेहनत की थी. इस फिल्म के निर्माण में करीमुद्दीन आसिफ को 14 साल लगे थे. जब आसिफ ने ये फिल्म बनाई थी उस समय अंग्रेजो का शासनकाल था हो सकता है शायद इस वजह से ही उन्हें इस फिल्म को बनाने में इतना वक्त लगा हो.

कहा जाता है कि मुगल-ए-आज़म उस दौर की सबसे महंगी फिल्म थी. उस दौर में जहां फिल्मे महज 5 से 10 लाख रूपए में बन जाती थी इस फिल्म को बनाने में पुरे 1.5 करोड़ रूपए खर्च हुए थे. खास बात तो ये है कि इस फिल्म के गीत जब प्यार किया तो डरना क्या में ही सिर्फ 10 लाख रूपए खर्च हुए थे. इस रकम में तो उस ज़माने में पूरी फिल्म ही बन जाया करती थी.

नौशाद साहब ने 105 गानो को रिजेक्ट किया था जिसके बाद उन्होंने इस फिल्म के लिए 'प्यार किया तो डरना क्या' गीत को चुना था. लता मंगेशकर ने इस गीत को स्टूडियो के बाथरूम के अंदर गाया था क्योकि इस गीत के लिए जो गूंज या धुन चाहिए थी वो मिल नहीं पा रही थी. मोहम्मद रफ़ी साहब ने इस फिल्म के गीत ‘ऐ मोहब्बत जिंदाबाद’ के लिए 100 गायकों से कोरस गवाया था. इस फिल्म को वैसे तो शपूरजी ने प्रोड्यूस किया था लेकिन फिल्म के डायरेक्टर आसिफ ने भी अपनी 16 साल की कमाई इस फिल्म में लगा दी थी.

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