त्याग, आत्म-अनुशासन और दान-पुण्य की अहमियत बताता है ईद

ईद का त्यौहार आज मनाया जाने वाला है. ऐसे में ईद रमज़ान के महीने के दौरान हमेशा मार्गदर्शक होने के लिए अल्लाह का धन्यवाद करने के लिए मनाया जाता है. आप सभी को बता दें कि बहुत सारे लोग मस्जिद जाते हैं, प्रार्थना करते हैं और क्षमा मांगते हैं. इसी के साथ इस दिन लोग दान -पुण्य भी करते है. आप सभी को बता दें कि यह बहुत पवित्र दिन माना जाता है. जी दरअसल ईद त्याग, आत्म-अनुशासन और दान-पुण्य की अहमियत को बताता है.

इसी के साथ लोगो का मानना है कि उपवास, प्रार्थना और दान के साथ, व्यक्ति एक विनम्र व्यक्ति बन जाता है और आत्म-नियंत्रण प्राप्त करता है. वहीँ ईद के बारे में एक और कहानी प्रचलित है जिसके अनुसार अरब में पैगम्बर हजरत मोहम्मद ने देखा यहां हर व्यक्ति एक दुसरे से दूर हो रहा है. उस दौरान पूरा अरब गरीब और अमीर में बट गया है और मोहम्मद साहब ने सभी को एकजुट करने के लिए विचार किया और सभी को एक नियम का पालन करने को कहा, जिसका नाम रोजा रखा. कहा जाता है उन्होंने कहा कि ''पुरे दिन हम कुछ भी नही खाएगे और पानी की एक बूंद भी ग्रहण नही करेगे. कोई भी पकवान हो हमें उसका त्याग करना है.''

उनका कहना था ''इससे सभी में त्याग और बलिदान की भावना जाग्रत होगी. एक दुसरे के दुःख को महसूस किया जा सकेगा और सभी के मन में सदभावना आएगी.'' उसी के बाद से रोजा रखा जाने लगा.

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