बालासाहेब की वसीयत को लेकर बांबे हाईकोर्ट में हुई सुनवाई

Apr 23 2015 05:06 PM
बालासाहेब की वसीयत को लेकर बांबे हाईकोर्ट में हुई सुनवाई
मुंबई : शिवसेना के संस्थापक स्व. बाल ठाकरे द्वारा लिखी गई वसीयत की बात सामने आई है। हालांकि इस वसीयत को लेकर उनके बेटे उद्धव ठाकरे और जयदेव ठाकरे एकमत नहीं हैं। मामले में उद्धव ठाकरे ने जनवरी वर्ष 2014 में बांबे हाईकोर्ट में प्रोबेट पीटिशन दायर की। हाल ही में बांबे हाईकोर्ट में इस मसले को लेकर हुई सुनवाई के दौरान बालासाहेब ठाकरे के पारिवारिक चिकित्सक डाॅ. जलिल पारकर सामने आए हैं। मिली जानकारी के अनुसार इस दौरान डाॅ. जलिल पारकर ने अपने बयान में उल्लेख किया कि बालासाहेब ने जब वसीयत लिखी थी तो उनकी दिमागी हालत और याददाश्त ठीक थी। 

हालांकि मामले में उनके पुत्र जयदेव ठाकरे का पक्ष है कि बालासाहेब की दिमागी हालत ठीक नहीं थी। वे वसीयत पर दस्तखत करने की स्थिति में नहीं थे। उनकी ओर से दलील दी गई कि उनके पिता ने अपना सारा जीवन मराठी लोगों और मराठी भाषा के लिए समर्पित कर दिया ऐसे में उनका वसीयत को अंग्रेजी में लिखकर मराठी में दस्तखत करना कहीं से उचित दिखाई नहीं देता। यह सही दिखाई नहीं पड़ा। हालांकि शिवसेना के कार्यकारी अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने कहा कि स्व. ठाकरे अपने पीछे जो संपत्ति छोड़कर चले गए उसका मूल्य करीब 14.85 करोड़ रूपए ही है। जबकि जयदेव का मत है कि मातोश्री का बंगला ही 40 करोड़ रूपए का है। 

एक नज़र स्व. ठाकरे की संपत्ति पर 

14.85 करोड़ रूपए के बैंक डिपाॅजिट्स, 150 करोड़ रूपए मूल्य का दादर स्थित सेना भवन, 30 करोड़ रूपए मूल्य के पार्टी के बाकी छोटे दफ्तर, मातोश्री बंगला, जिसकी कीमत 80 करोड़ रूपए आंकी जा रही है, यही नहीं पनवेल में एक फार्महाउस भी है जिसकी कीमत 5 करोड़ बताई जा रही है। करजत का फार्म हाउस भी स्व. ठाकरे की संपत्ति में शामिल है यही नहीं ठाकरे की संपत्ति में भंडारदार में एक जमीन भी शामिल है। 

किसे क्या मिला 

हाईकोर्ट में दर्शाई गई वसीयत के अनुसार बालासाहेब ठाकरे ने मातोश्री का बंगला उद्धव और उनके परिवार के नाम कर दिया। इसके अलावा करजत का फार्म हाउस और भंडारदार का भूखंड उद्धव को दिया गया। यही नहीं मातोश्री का ग्राउंड फ्लोर पार्टी की सामाजिक - राजनीतिक गतिविधियों के लिए दिया गया। दूसरी मंजिल के साथ तीसरी मंजिल उद्धव के परिजन को दी गई। जबकि पहली मंजिल जयदेव - स्मिता के बेटे ऐश्वर्य को दी गई। वसीयत में कहा गया कि मंजिल पर जयदेव और स्मिता का कोई दखल नहीं होगा मगर रखरखाव का खर्च स्मिता को उठाना पड़ेगा। उल्लेखनीय है कि बालासाहेब ठाकरे के सबसे बड़े बेटे बिंदु माधव ठाकरे की सड़क हादसे में मौत हो गई, ठाकरे ने संपत्ति में बिंदु माधव के परिवार को किसी तरह का हिस्सा नहीं दिया। b