अजीत डोभाल के बारे में जानिए ये अनसुने किस्से

नई दिल्ली: भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए पीएम नरेंद्र मोदी के सलाहकार अजीत डोभाल का आज ही के दिन जन्म हुआ था. देशभर में अजीत डोभाल भारत के जेम्स बॉन्ड के नाम से भी लोकप्रिय हैं, क्योंकि उन्होंने अपनी जिंदगी भारत के लिए ही बिताया है जो वर्षों तक शत्रुओं के बीच रहा तथा सेना को खुफिया खबर देता रहा. रिपोर्ट के अनुसार, डोभाल ने भारत की रक्षा के लिए अपनी जिंदगी के करीब चालीस साल गुमनामी में गुजारे हैं. 20 जनवरी 1945 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में जन्मे डोभाल के पिता का नाम गुणानंद डोभाल है, जो स्वयं भी सेना में बड़े अफसर थे. उनकी आरभिंक शिक्षा अजमेर के मिलिट्री स्कूल में हुई. वर्ष 1967 में उन्होंने आगरा विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में पहली पॉजिशन के साथ डिग्री ली. तत्पश्चात, वो IPS बनने की तैयारी में लग गए तथा वर्ष 1968 में केरल कैडर के IPS अफसर बने. पुलिस सेवा में चार वर्ष गुजारने के पश्चात् 1972 में भारत की खुफिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो मतलब आईबी में सम्मिलित हो गए.

वही भारत सरकार के पांचवें NSA तथा राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष अजीत डोभाल लगभग 7 वर्ष तक पाकिस्तान में जासूस बनकर रहे. इस के चलते उन्होंने स्वयं को एक मुसलमान की भांति रखा तथा किसी को भनक तक नहीं लगने दी कि वो एक हिंदू परिवार से आते हैं. वहां उन्होंने अंडरकवर ऑपरेटिव की भांति काम किया. इस के चलते उन्होंने भारत के लिए खुफिया तथा आतंकवादी गतिविधियों से संबंधित जानकारी एकट्ठा करने में महत्वपूर्ण किरदार निभाया. वो अजित डोभाल ही थे जिन्होंने 15 बार भारतीय विमानों के अपहरण की संभावना को समाप्त किया. 

वही जून 1984 में पंजाब के गोल्डन टेम्पल को खालिस्तानी समर्थकों से मुक्त कराने के लिए ऑपरेशन ब्लू स्टार के कुछ वक़्त ऑपरेशन ब्लैक थंडर को अंजाम दिया गया. दरअसल ऑपरेशन ब्लू स्टार के लगभग 4 वर्ष पश्चात् खालिस्तानी समर्थक एक बार फिर स्वर्ण मंदिर के अकाल तख्त के पास पहुंच गए. यही वो वक़्त था जब भारत के मौजूदा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने अहम किरदार निभाया. इस ऑपरेशन के चलते डोभाल रिक्शेवाले के भेष में मंदिर में दाखिल हुए तथा महत्वपूर्ण भारतीय सेना को दी. अजीत डोभाल ने आईएसआईएस दहशतगर्दो के कब्जे से 46 भारतीय नर्सों को छुड़ाने में भी महवत्पूर्ण किरदार निभाया.

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