योगा के द्वारा विश्व वेलनेस की ओर जाएगा : मोदी

चंडीगढ़ : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज चंडीगढ़ के पीजीआई में अलग ही गणवेश में नज़र आए। इस दौरान उन्होंने कैप और गाउन धारण कर रखा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह स्वरूप बेहद अद्भुत लग रहा था। नीला कैप और गाउन पहने नरेंद्र मोदी आज दीक्षार्थियों के बीच दीक्षार्थियों जैसे ही लग रहे थे। इस दौरान उन्होंने चंडीगढ़ के पीजीआई काॅलेज के दीक्षांत समारोह में शिरकत की । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चंडीगढ़ एयरपोर्ट के टर्मिनल का लोकार्पण भी किया। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि शिक्षांत समारोह नहीं शिक्षा का अंत नहीं, दीक्षांत समारोह है। सबसे पहला दीक्षांत समारोह करीब ढाई हजार वर्ष पहले हुआ ऐसा लिखित मूल्य प्राप्त होता है। तेत्रेय उपनिषद में सबसे पहले दीक्षांत समारोह की चर्चा। इसी धरती से संस्कार की यह परंपरा प्रारंभ हुई है। जब दीक्षांत समारोह प्रारंभ होता है तब क्या होता है। उन्होंने अपने विद्यार्थी जीवन को याद करते हुए कहा कि आपको लगता है कि सब परेशानियों से मुक्ति मिल गई।

हकीकत में जो आपने सीखा है पाया है समझा है। आध्यात्म की कसौटी उसके कारण मिला जीवन यापन के लिए खुला रास्ता वह समाप्त नहीं होती। बल्कि वहां से जीवन यात्रा प्रारंभ होती है। विद्यार्थी जीवन में जब आप पेशेंट को देखते हैं तो किताब याद रहती है। मगर जब विद्यार्थी जीवन के बाद आप देखते हैं तो जिंदा इंसान सामने होता है किताबें याद नहीं आती है। एक मैकेनिक का कारोबार पुर्जों के साथ होता है। आजकर चिकित्सक का काम भी पुर्जों के साथ होता है। हम जिंदा इंसान के साथ कारोबार करते हैं इसलिए ज्ञान पर्याप्त नहीं होता है। मानवीय संवेदनाओं का सेतु होता है। बीमार पर फोकस करने वाले चिकित्सक अधिक सफल होते हैं। जो बीमारी को ठीक करता है पेशेंट को ठीक नहीं कर पाता है।

मगर जब आप बीमार को ठीक करते हैं तो मजदूर भी 20 वर्ष बाद वापस आकर आपकी फीस चुका देगा। तकनीक से मेडिकल साईंस जुड़ गया है। चिकित्सक टेस्ट करने की बात करता है। पहले दवाई नहीं देता। अर्थात् चिकित्सक को निर्णय करने का आॅप्शन मिलता है। उसे निर्णय करने का आॅप्शन मिलता है। नवीन तकनीक के साथ जुड़े परिचित चिकित्सक हैं। तो पेशेंट को समझना और उसकी बीमारी को समझने में तकनीक आपको मदद करती है।

इस तरह के बदलावों में मेडिकल साईंस की मदद होती है लेकिन आप चिकित्सक क्यों बने। इसलिए बने क्योंकि अच्छे माक्र्स आए। इसलिए चिकित्सक बने कि जो समय बीताना था वह बीताने के लिए चिकित्सक बने। चिकित्सक बनाने में वार्ड बाॅय, चाय बनाने वाले का योगदान भी रहा होगा। जब ठंड में सोए उस व्यक्ति ने चाय बनाई होगी और आपने परीक्षा दी होगी और आप उत्तीर्ण हुए उसका योगदान रहा। हमारे जीवन को बदलने में किसी का योगदान होता है। इसका अर्थ यह है कि समाज का ऋण चुकता करना हमारा दायित्व बनता है। यह देश हमारा है। आज हम जो कुछ भी हैं गरीब के हक की कोई चीज़ उससे लेकर देते हैं।

महात्मा गांधी के कार्य का उल्लेख

यदि मैं उलझन में हूं तो समाज के आखिरी व्यक्ति के चेहरे को देखता हूं और विचार करता हूं कि जो मैं कर रहा हूं उसकी भलाई में है या नहीं। आप समाज की जिम्मेदारी उठाने का निर्णय करते हैं। जब भी दुविधा हों तो पलभर के लिए उस व्यक्ति को याद कर लीजिए आपका निर्णय गलत नहीं होगा। भारत ने अंतर्राष्ट्रीय योगा दिवस मनाया। पूरी दुनिया इस दिवस को मना रही है यह यूएन के इतिहास की ब़ड़ी घटना है। वर्तमान में प्रीवेंटिव हैल्थ केयर का समय है। दवाई से गुजारा करने की बजाय वह अच्छे स्वास्थ्य की तुलना कर रहा है। बीमारी को एडस्ट करेंगे या वैलनेस को एड्रेस करेंगे। लोगों में योगा की ओर आकर्षण बढ़ा है।

योगा के द्वारा विश्व वैलनेस की ओर जाएगा। सफल फिजियोथेरेपिस्ट होने के लिए अच्छे योग टीचर होना जरूरी है। समाज के जीवन में बदलाव आ रहा है। वह साईड इफेक्ट के चक्कर में नहीं पड़ना चाहता। हेल्थ सेक्टर ने इन बातों को ध्यान में रखते हुए भी आगे की नीतियां बनाई हैं। निराश होने का कारण नहीं है विफलता भी सफलता के लिए अच्छा शिक्षक बन जाती है। लोगों को निराश होने की आवश्यकता नहीं है। जिन्होंने आज सफलता पाई और जीवन की नई उंचाईयों को पाने का अवसर मिला है उन्हें शुभकामनाऐं हैं।

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