तो इस वजह से मनाया जाता है राष्ट्रीय मतदाता दिवस'

आज हम आपको बताने जा रहे है 'राष्ट्रीय मतदाता दिवस' के बारे में. जी हां  आज का दिन मतदाता दिवस के रूप में मनाया जाता है. यह दिन हर इंसान को अपने कर्तव्यों को याद दिलाने के साथ राष्ट्र के निर्माण में जन भागीदारी को दर्शाता है, किन्तु क्या इस दिन को सिर्फ एक दिवस के रूप में स्थापित करना सही होगा? जिसमे हर साल की तरह इस साल भी इस दिन की गाथा आपके सामने बढ़ा चढ़ा कर पेश कर दी जाये. किन्तु सच बात अगर देखी जाये तो मतदान और मतदाता में सामंजस्य की कमी है. जिसका सीधा असर राष्ट्र के ऊपर पड़ता है. बात को ज्यादा ना घुमाते हुए सीधे शब्दो में कहे तो वोट पर नोट भारी पड़ रहे है. यही नही इस नोट की वजह से ना सिर्फ वोट बैंक की राजनीती बदल जाती है बल्कि मत, मतदाता, मानसिकता के साथ मर्यादा भी बिक जाती है. यही एक छोटी सी चीज है जो बार बार इस दिन के महत्त्व को हर बार की तरह बताने को मजबूर करती है. 

देश को आजाद होने के बाद से ही हम एक बात जरूर सुनते आ रहे है कि मतदाता लोकतंत्र की रीढ़ है. उसके हाथ में सही गलत का फैसला होता है, वह सत्ता शासन और देश का स्वरूप चंद मिनटों में बदल सकता है. उसके पास वह शक्ति होती है जिसके द्वारा वह एक ऐसे इंसान को सत्ता सौंप सकता है जो देश को नयी ऊंचाइयों तक ले जाये. किन्तु देश में आज भी कुछ ऐसी परिस्थितियां देखने को मिल जाती है जहा नोट के बदले वोट बिक जाता है. यही नही ऐसे किस्से आमतौर पर देखने को मिल जाते है, जिसमे बड़े चाव से पैसे लेकर अपने मत को बेचकर हम देश की तरक्की के ढिंढोरे पीटते रहते है. क्या हम अभी भी नासमझ है? क्या हमें सही गलत में फर्क पता नही है?

हर व्यक्ति के लिए जितना जरुरी मतदान होता है उतना ही जरुरी उस मत का सम्मान भी होता है. अगर लोकतंत्र को एक सही दिशा की और अग्रसर करना चाहते हो तो सबसे पहले खुद को समझना होगा. जब तक वोटबैंक और नोट बैंक सामानांतर चलते रहेगे तब तक कुछ नही होगा. इसमें बदलाव की जरूरत है. तब ही आप मतदाता दिवस को सार्थक बना पाओगे.

भारत आज विश्व के प्रमुख देशो में अपना भी कीर्तिमान स्थापित कर रहा है ऐसे में हर एक इंसान का मतदान ना करना या फिर गलत तरीके से मतदान करना राष्ट्र को कई साल पीछे धकेल रहा है. हर व्यक्ति के पास सिर्फ एक ही शक्ति होती है, और वह है लोकतंत्र की शक्ति. जिसको अवसरवादी ना बनाते हुए राष्ट्रवादी बनाये और अपने मत का सही इस्तेमाल कर देश को विश्व में और आगे बढ़ाये. 

आज के ही दिन 25 जनवरी, 1950 को भारत निर्वाचन आयोग का गठन हुआ था. जिसके चलते राजनीतिक प्रक्रिया में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए वर्ष 2011 से निर्वाचन आयोग के स्थापना दिवस 25 जनवरी को 'राष्ट्रीय मतदाता दिवस' के रूप में मनाने की एक सफलतम शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य लोगो के बिच में मतदान को लेकर जागरूकता को फैलाने के साथ सही पारदर्शिता स्थापित करना है. हम सभी को इसे एक दिवस के रूप में ना देखते हुए लोगो के बिच में मतदान की सही शक्ति का जनसंदेश पहुँचाना चाहिए. इसके साथ ही वोट के बदले नोट वाली रणनीति पर अंकुश लगाना चाहिए. जिससे नोट पर वोट भारी हो, ना की वोट पर नोट.

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