क्या हैं राष्ट्रध्वज फहराने के नियम

नई दिल्ली: देश में अब तिरंगा फहराना काफी गौरव का प्रतीक हो गया है। इतना ही नहीं लोगों में इसे लेकर उत्साह भी होता है। यही नहीं लोग स्वाधीनता का उल्लास मनाते हैं। राष्ट्रीय ध्वज फहराने की सभी को छूट है मगर विभिन्न नियमों को ध्यान में रखे जाने की भी आवश्यकता है। दरअसल आमतौर पर राष्ट्रध्वज फहराने के नियमों को लोग ध्यान में नहीं रखते हैं। अक्सर ऐसा होता है जब कई लोग उल्टा राष्ट्रध्वज ही फहरा देते हैं। इतना ही नहीं कई बार सूर्यास्त के बाद भी राष्ट्रध्वज फहराता रहता है।

कभी तो नाश्ते की प्लेट में ही राष्ट्रध्वज को रख दिया जाता है और कुछ लोग उस पर हस्ताक्षर तक कर देते हैं यह सब अनजाने में और उत्साह में होता है। देश के प्रति जो आदर होता है वह सहसा प्रकट हो जाता है। मगर नियमों की अनदेखी हो जाती है और यह गंभीर अपराध में परिवर्तित हो जाता है। मगर फ्लैग कोड आॅफ इंडिया पर यदि हम ध्यान दें तो फिर हम नियमों को आसानी से समझ सकते हैं।

दरअसल नियम विरूद्ध ध्वज फहराने पर तीन साल की जेल हो सकती है। या उसे अर्थदंड जिसे जुर्माना कहा जाता है भरना पड़ सकता है। तिरंगा सूती वस्त्र का, सिल्क का या फिर खादी का होना चाहिए। इसमें प्लास्टि का ध्वज बनाने की अनुमति नहीं है। इतना ही नहीं फटे या फिर क्षतिग्रसत ध्वज को फहराया नहीं जा सकता है। तिरंगे ध्वज का निर्माण आयताकार में होता है इसका अनुपात 3 अनुपात 2 होता है।

इतना ही नहीं इस ध्वज का उपयोग यूनिफाॅर्म या फिर साज सज्जा के लिए नहीं किया जा सकता है। ध्वज में नीले रंग का ही अशोक चक्र बनाया जाता है। यह सफेद रंग पर होता है। ध्वज पर कुछ भी बनाना या लिखना प्रतिबंधित होता है। वाहन के पीछे, बोट या यान में इसे उपयोग नहीं किया जा सकता। भवन को ढांकने में इसका उपयोग नहीं हो सकता है। यह कहीं से भी कटा या फटा नहीं होना चाहिए।

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