नए वर्ष की शुरुआत विदेश यात्रा से साथ करेंगे पीएम मोदी

नई दिल्ली: पीमए नरेंद्र मोदी वर्ष 2022 की शुरुआत विश्वसनीय सहयोगी संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत की यात्रा के साथ करने वाले है. इन्हीं दौरों के साथ उनकी 2022 की विदेश यात्रा कैलेंडर की शुरुआत से होने वाली है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘दुबई 2020 एक्सपो’ का दौरा करने वाले है. इस यात्रा का वास्तविक उद्देश्य दोनों सहयोगियों को कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर  के बीच  इंडिया के साथ खड़े होने के लिए शुक्रियादा करना है. दोनों देशों ने कोविड की दूसरी लहर के बीच विशाल भारतीय प्रवासी लोगों की देखभाल की और उनका ध्यान रखा. संयुक्त अरब अमीरात में इंडिया के तकरीबन 40 लाख लोग रहते हैं और कुवैत में लगभग 10 लाख प्रवासी भारतीय हैं, जो जरूरत के वक़्त में भारतीय अर्थव्यवस्था में योगदान देते रहे.

गवर्नमेंट भले ही इस पूरी यात्रा के बारे में चुप्पी साधे हुए है, लेकिन  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनवरी 2022 के पहले 10 दिनों में इन दोनों देशों की यात्रा  करने वाले है. इन दोनों विदेश यात्राओं पर विशेष ध्यान भी दिया जा रहा है क्योंकि दोनों देश भारत की मध्य-पूर्व क्षेत्र में विदेश नीति के केंद्र में है. जंहा इस बात का पता चला है कि अगस्त 2015 में क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के निमंत्रण पर UAE की अपनी प्रथम यात्रा के उपरांत से, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नजर पूरी तरह अबू धाबी के साथ संबंधों को और भी ज्यादा पक्का करने पर रही है, विदेश मंत्री एस जयशंकर भी बीते रविवार को ही UAE से लौटे हैं. संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका और चीन के उपरांत  इंडिया का तीसरा सबसे बड़ा व्यापार भागीदार है, जिसके साथ इंडिया का व्यापार 60 बिलियन अमरीकी डालर से ज्यादा का है. जनवरी 2022 की यात्रा प्रधानमंत्री मोदी की UAE की चौथी यात्रा होने वाली है.

अबतक मिली जानकारी के अनुसार भारत और संयुक्त अरब अमीरात ने आज सभी इंडिया विरोधी आपराधिक और आर्थिक गतिविधियों को समाप्त करके साइबर सुरक्षा, कट्टरपंथ के विरुद्ध कार्रवाई के साथ-साथ रक्षा और खुफिया सूचना शेयर करने के क्षेत्र में गहन सहयोग के साथ अपने संबंधों को एक नए मुकाम तक पहुंचाया जा चुका है. वहीं इस ब्रेन में यह भी कहा या है कि ‘जिस तरह पूर्वी क्षेत्र में भारत के लिए सिंगापुर राजनयिक गतिविधि का केंद्र है, उसी तरह अबू धाबी इंडिया में निवेश प्राप्त करने के लिए मध्य-पूर्व क्षेत्र में दूसरा केंद्र है.’ इंडिया मानता है कि UAE ने बीते कुछ सालों में न केवल वैश्विक बुनियादी ढांचा विकसित किया है, बल्कि मध्य-पूर्व में राजनयिक गतिविधि का भी केंद्र बनकर सामने आया है.

इस इलाके में यह एक प्रमुख क्षेत्रीय रक्षा शक्ति भी है और इस बात को हम इस तरह भी समझ सकते हैं कि बीते सप्ताह ही संयुक्त अरब अमीरात ने फ्रांस से 80 राफेल लड़ाकू विमान और 13 भारी लिफ्ट हेलीकॉप्टर खरीदने का निर्णय किया. हम बता दें कि संयुक्त अरब अमीरात की तरह, कुवैत के साथ भी भारतीय संबंध बहुत खास हैं क्योंकि कुवैत ने इंडिया में महामारी की दूसरी लहर के बीच बड़ी संख्या में ऑक्सीजन सिलेंडर और अन्य चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति की थी.

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