कोरोना संकट में पुराने तरीकों से करना होगी बचत

बीते जमाने से हर समाज में दादी-नानियों के किस्से और नसीहतें सदियों से पीढ़ियों को मुसीबतों से निपटने के सरल और सहज मंत्र देती रही हैं. लेबनानी-अमेरिकी सांख्यिकी गणितज्ञ, शेयर बाजारों के जानकार और चिंतक नासिम निकोलस तालेब के मुताबिक उनमें से बेहद मशहूर नसीहत यह है कि हर किसी को मुसीबत के वक्त के लिए कुछ रकम बचाकर रखनी चाहिए. 

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द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दुनियाभर के देशों ने इसे करीब-करीब भुला दिया और समकालीन अर्थशास्त्रियों की सुनते हुए जमकर कर्ज लिए. इससे बुरे वक्त के लिए उनकी तैयारियों पर गंभीर असर पड़ता दिखा है. नवीनतम ग्लोबल संकट कोरोना ने इन तैयारियों की करीब-करीब पोल खोल दी है. वैसे, तालेब के मुताबिक कोरोना ने एक और काम किया है. वह यह, कि अब दुनियाभर के देश अगली संभावित महामारी को सार्स, इबोला और ऐसे अन्य वायरस आक्रमण की तरह हल्के में नहीं लेंगे बल्कि समय पर उससे निपटने में जुट जाएंगे. कोरोना से मिली शायद यही सबसे बड़ी सीख है.

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आपकी जानकारी के लिए बता दे कि वर्ष 2001 में नासिम निकोलस तालेब की किताब 'फूल्ड बाई रैंडमनेस' प्रकाशित हुई थी. मैं उसी समय से उनका प्रशंसक हूं. पिछले सप्ताह आदित्य बिड़ला म्यूचुअल फंड ने तालेब के साथ सवाल-जवाब का एक सत्र आयोजित किया था. मुझे इस सवाल-जवाब के सत्र में शामिल होने से काफी खुशी हुई. तालेब के पहले टॉक शो की तरह इस बार न्यूज बाइट का माहौल नहीं था. यह टीवी पर नहीं था. ऐसे में कोई जल्दी नहीं थी. और विज्ञापनों के लिए बार-बार ब्रेक लेने की जरूरत भी नहीं थी. यहां पर तालेब अपनी पूरी लय में थे और बिना समय गंवाए सीधे सबसे अहम बातों पर अपनी राय रख रहे थे.

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