मैं हिंदूस्तानी हूं, मैं हिंदू हूँ, सेक्यूलर होना सरकार का काम है: मनोज मुंतशिर

मनोज मुंतशिर एक बेहतरीन राइटर है और उन्होंने अब तक कई गीतों को लिखा है। ऐसे में हाल ही में मनोज ने आजतक डॉट इन से देशभक्ति, इन-टॉलरेंस, सेक्यूलरिज्म पर दिल खोलकर बात की। इस दौरान उन्होंने अपनी नयी कविता के बारे में कहा, 'मैं जिस भारत से आता हूं, उस भारत से 135 करोड़ लोग भी आते हैं। मेरा रोल बस यही है कि मैं लोगों को यही बात याद दिलाता हूं। ताकि लोगों को अपने रूट्स का पता हो। आपको गर्व होना चाहिए कि आपका जन्म इस देश में हुआ है।' इसी के साथ उन्होंने बचपन के दिनों को याद करते हुए कहा, 'मेरी मां मुझे बताती थी कि जब मैं तीन साल का था और जब कभी रेडियो पर देशभक्ति के गानें बजते थे, तो मैं सैल्यूट की मुद्रा में खड़ा हो जाया करता था। वहीं स्कूल के वक्त, जब भी 15 अगस्त या 26 जनवरी होता था, तो दोस्तों की इज्जत बचाने वाला मैं ही हुआ करता था। क्योंकि मैं स्टेज पर खड़े होकर ऐ वतन जैसे गाने बड़ी मस्ती से गाता था, आवाज अच्छी नहीं थी लेकिन बात इमोशन की थी।'

आगे उन्होंने कहा- 'मेरा जो गाना है, तेरी मिट्टी, यह मेरे लिए भी खोज थी कि आखिर अंदर से मैं क्या हूं। मैं अंदर से जो भी हूं, उसमें बड़ा हाथ यह रहा कि इस गाने ने मुझे उभार दिया। पिछले काफी दिनों से हमने अपनी राष्ट्रियता का धरातल खोया है, हम जरूर तरक्की कर आगे निकले हैं लेकिन गहराई अब नहीं रही है। मेरे लिए गहराई यह है कि हमें अपने दस हजार साल को याद करने की जरूरत है। हम ऐसे देश में हैं, जहां राम, बुद्ध, विवेकानंद, कृष्ण पैदा हुए, जहां चार वेदों, उपनिषदों का जन्म हुआ। ये भारत जो अवतारों की भूमिका रही है, यहां की हर बात गौरान्वित करने वाली है लेकिन हमने कहीं यह सेंस ऑफ प्राइड मिस किया है। मैं तो मानता हूं, जो इंसान भारत देश में पैदा होता है, वो उसी वक्त स्पेशल हो जाता है। हमारे अंदर दस हजार साल का डीएनए होता है।'

इसी के साथ उन्होंने यह भी कहा कि, 'मेरे लिए देशभक्ति का मतलब पुरानी चीजों पर ढोल पीटना कतई नहीं है। मेरे लिए राष्ट्रियता का मतलब है कि मैं पुरानी बुनियादों पर नया महल बनाऊं। मैं लोगों को यह बताऊं कि उनके अंदर कितनी बड़ी शक्ति है। अब इसे आप देशभक्ति कह लें, लेकिन मैं दिल से चाहता हूं कि जब हम अपनी आजादी के सौ साल पूरा करें, तो उस वक्त विश्व गुरू के रूप में पूरी दुनिया को दिखाएं। यह तभी संभव होगा, जब हमें अपनी ताकत पता होगी। मैं वीडियोज भी इसलिए बनाता हूं ताकि लोगों को अपनी पोटेंशियल का अहसास हो।' आगे उन्होंने कहा- 'जितने लोग नेशनलिज्म के ऊपर कीचड़ उछालते हैं, मुझे लगता है कि इन सबको वाकई अपने दिमाग का इलाज करवाना चाहिए। क्योंकि ये लोग भारत और भारतीयता दोनों के लिए ही खतरा है। मैं भी पॉलिटिकल स्टेटमेंट्स देखता हूं, मैंने अभी अखिलेश यादव जी का स्टेटमेंट सुना, जो कह रहे हैं कि पाकिस्तान हमारा दुश्मन नहीं है। सच कहूं, यह सुनने के बाद मुझे थोड़ी देर के लिए अच्छा नहीं लगा। मैं सोच रहा था कि इतना पढ़ा लिखा इंसान जब इस तरह की बात करता है, तो इसमें उसका एजेंडा भी समझ आता है।आप एक समूह या वर्ग विशेष को खुश करना चाहते हो। आप किसी एक समूह के लिए नेशनल इंट्रेस्ट के खिलाफ नहीं बोल सकते हैं। आप यह कह दें कि पाकिस्तान या चीन आपका दुश्मन नहीं है, तो हो चुकी बात। आपको हमेशा अपने दोस्त और दुश्मन के बीच अंतर पता होना चाहिए।'

इसी के साथ उन्होंने यह भी कहा- 'मुझे क्लैरिटी है कि हां, मैं नेशनलिस्ट हूं। मुझे ये क्लैरिटी है कि मैं हिंदूस्तानी हूं। मुझे इस बात की भी क्लैरिटी है कि मैं हिंदू और मुझे इन तीनों में कोई शर्मिंदगी नहीं है। मैं इन तीन चीजों पर बकायदा सीना ठोक कर प्राइड लेता हूं और मैं जो नहीं हूं, वो बताता हूं, मैं सेक्यूलर नहीं हूं। सेक्यूलर एक ऐसा शब्द है न, जो मुझे लगता है कि दुनिया का सबसे ज्यादा ओवर यूज्ड और अब्यूज्ड वर्ड है। आपको ऐसा बता दिया जाता है कि आप सेक्यूलर नहीं है, तो बड़े बुरे आदमी हैं। मैं नहीं हूं सेक्यूलर, मैं इसलिए ये नहीं हूं क्योंकि सेक्यूलर होना सरकार का काम है। सरकार जो अपनी योजना बनाए, उसे लेकर सेक्यूलर सोच हो। अगर मैं सेक्यूलर होता हूं, तो हिंदूज्म में यकीन नहीं करता, तो मैं कहता हूं कि मैं वसुधैव कुटुम्बकम में भी यकीन नहीं करता, मैं इसमें भी यकीन नहीं करता कि दुनिया में सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामया।। दुनिया में हर कोई सुखी हो और हर कोई खुश हो। तब मैं चार वेदों में यकीन नहीं करता, फिर मेरा विलिव सिस्टम क्या है यार। मैं सेक्यूलर बनना ही नहीं चाहता, मैं प्राउड हिंदू बनना चाहता हूं। मैं उस धर्म का नगाड़ा बजाता हूं जिसने पूरी दुनिया को बंधुत्व सीखाया है। कोई रिलीजन बुरा नहीं है, हर किसी को हक है कि वे अपना धर्म निभाए।'

source: aajtak

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