मकर संक्रांति पर जरूर करें तिल के यह उपाय, चमक जाएगी किस्मत

Jan 13 2019 05:00 PM
मकर संक्रांति पर जरूर करें तिल के यह उपाय, चमक जाएगी किस्मत

आप सभी को बता दें कि मकर संक्राति पर्व 14 और 15 जनवरी को मनाया जाने वाला है. ऐसे में यह पर्व हिंदू धर्म का प्रमुख पर्व माना जाता हैं. कहते हैं यह त्योहार माघ माह में कृष्ण पंचमी को देश के लगभग सभी राज्यों में अलग-अलग सांस्कृतिक रूपों में मनाया जाता हैं. ऐसे में इस दिन से सूर्य उत्तरायण होता हैं, वही जब उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर मुड़ जाता हैं. आप सभी को बता दें कि इसे मकर संक्रांति माना जाता हैं. कहते हैं हिंदू धर्म में सूर्य की पूजा अर्चना को विशेष महत्व दिया जाता हैं और सूर्य देवता के रूप में ही पूजा जाता हैं. इसी के साथ सूर्य देवता ही पृथ्वी पर उपस्थि​त सभी ​जीवित प्राणियों का भरण पोषण करते हैं और इस बार मकर संक्रांति के त्योहार पर एक विशेष योग भी बन रहा हैं जो सभी की मनोकामना को पूरा करेगा. 

आप सभी को बता दें कि मकर संक्रांति एक ऐसा पर्व है जिसमें पुण्य काल के समय किए गए उपायों का शुभ प्रभाव साल भर तक लाभ पंहुचाता है और निरोगी काया, धन-समृद्धि बढ़ाने के लिए, सफलता की चाह रखने वाले मनुष्य को चाहिए वो इन कामों को जरुर करना चाहिए. जी हाँ, शास्त्रों के अनुसार ये कार्य करने वाला व्यक्ति हार का मुंह नहीं देखता है और वह हमेश उन्नति करता है. आइए बताते हैं उन कामों के बारे में.


तिल स्नान - कहते हैं शास्त्रों में मकर संक्रांति पर तिल-स्नान का बहुत महत्त्व बतलाया गया है और इस दिन तिल - स्नान करने वाला मनुष्य सात जन्म तक रोगी नहीं होता है.

तिल का उबटन - इस उबटन को अपने पूरे शरीर पर लगा लें. कहते हैं ऐसा करने से आपका शरीर से सभी गंदगी दूर हो जाती है और इसी के साथ ही पूरे साल आपको स्वास्थय लाभ होगा.


संक्रांति पर स्नान - कहते हैं सूर्य की संक्रांति के दिन जो मनुष्य स्नान नहीं करता है और वह सात जन्मों तक रोगी रहता है. इस कारण से संक्रांति पर स्नान जरुर करें और इस मंत्र का जाप करें .


रवि संक्रमणे प्रासेन स्नानाद्यस्तु मानवः।
सप्तजन्मनि रोगो स्द्यान्निर्धनश्चैव जायतेः।


तिल से करें अभिषेक - कहते हैं नहाने के बाद आप सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल चढ़ा दें और इस बात का ध्यान रखें की उस जल में काले तिल जरूर होने चाहिए.
 

तिल का भोजन - कहते हैं मकर संक्रांति पर तिल के व्यंजन खाने की परंपरा मानी गई है क्योंकि इससे रोगों में लाभ होने लगता है और वह भाग जाते हैं.

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