चंबल नदी पार कर मध्य प्रदेश आने वालों पर रखी जा रही है नजर

कोरोनावायरस की रोकथाम के लिए लॉक डाउन की अवधी को बढ़ा दिया गया है. चंबल नदी राजस्थान और यूपी के बीच मध्य प्रदेश की सीमा का निर्धारण करती है. मप्र के श्योपुर से भिंड तक नदी के करीब 147 घाट हैं. इनमें से ज्यादातर घाटों पर स्थानीय नाविक नावों का संचालन करते हैं. इन नावों का कोई हिसाब-किताब वन विभाग और प्रशासन के पास नहीं है. ऐसे में यह नाव अभी भी लोगों को नदी पार करा रही हैं.

दरअसल यूपी सीमा में रहने वाले नाविकों की नावों में तो पुलिस ने पानी भरवा दिया है, लेकिन मध्य प्रदेश में इन नावों को नजर अंदाज कर रखा है. श्योपुर से भिंड जिले तक राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में चलने वाली नावों को वन विभाग ने अवैध घोषित कर रखा है. इसके बाद भी नदी में औसतन 125 से भी ज्यादा नावें संचालित होती हैं. वन विभाग और प्रशासन ने तीन साल पहले इन नावों की गिनती का असफल प्रयास किया था. अभयारण्य में नाव चलाने की अनुमति नहीं है फिर भी मध्य प्रदेश, राजस्थान और यूपी के चंबल किनारे वाले गांवों में रहने वाले ग्रामीण अपनी आजीविका के लिए छोटी नावों से लेकर बड़ी नावों का संचालन भी करते हैं.

बता दें की इन नावों पर नियंत्रण के लिए कोई भी लिखित निर्देश भी प्रशासन और पुलिस ने जारी नहीं किया है. हालांकि थानों के बीट प्रभारियों को इन नावों के बारे में जानकारी है. उन्होंने अपने स्तर पर नाविकों को नाव न चलाने की चेतावनी दी हुई है. लेकिन थाना नगरा, सबलगढ़, चिन्नाौनी, जौरा, दिमनी, सरायछौला, अंबाह और पोरसा सहित, नगरा व महुआ इलाकों में नावें अभी भी घाटों से लोगों को पार करा रही हैं.

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