इस शख्स के कहने पर मुंबई आए थे कुलभूषण खरबंदा

बॉलीवुड फिल्मों के इतिहास में कुछ ऐसी फिल्में हैं जिन्हें हीरो के कारण नहीं बल्कि विलेन की वजह से लोग याद रखते हैं। फिल्म ‘शान’ के खलनायक ‘शाकाल’ को भला कौन भूल सकता है। इस आइकॉनिक भूमिका को अपनी एक्टिंग से जीवित किया था बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता कुलभूषण खरबंदा ने। अपने लंबे करियर में कुलभूषण ने सभी प्रकार की भूमिका निभाई, लेकिन आज भी उनकी सबसे बड़ी पहचान शाकाल से ही जुड़ी हुई है।

21 अक्टूबर 1944 को पंजाब में जन्मे कुलभूषण खरबंदा ने अपना अध्ययन दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज से किया था। दिल्ली में वे लंबे वक़्त तक रहे। हालांकि, कला के प्रति उनका लगाव बचपन से ही था, लेकिन कॉलेज के समय उन्हें नाटकों का चस्का लग गया। एक इंटरव्यू में अभिनेता ने बताया था कि पढ़ाई पूरी करने के पश्चात् उन्होंने दिल्ली में ही दोस्तों के साथ मिलकर ‘अभियान’ नाम से एक थिएटर ग्रुप का आरम्भ किया था। साथ ही एक अन्य थिएटर ग्रुप ‘यांत्रिक’ से भी जुड़े हुए थे।

वही फिल्मों में आने से पहले उन्होंने खूब थिएटर किया। कोलकाता के महान रंगकर्मी श्यामानंद जालान की संस्था ‘पदातिक’ के लिए भी कुलभूषण ने कई प्ले किए थे। ‘सखाराम बाइंडर’, ‘आत्मकथा’, ‘बाकी इतिहास’, ‘गिनपिंग’ आदि कई मशहूर नाटक उन्होंने किए हैं। लोकप्रिय डायरेक्टर श्याम बेनेगल, उनके अभिनय शैली के कायल थे। उन्हीं के कहने पर कुलभूषण 70 के दशक में मुंबई आए। तथा अपनी फिल्मी यात्रा आरम्भ की। श्याम बेनेगल के साथ उन्होंने कई फिल्में की, जिनमें ‘निशांत’, ‘मंथन’, ‘भूमिका’, ‘जुनून’, ‘कलयुग’, ‘त्रिकाल’, ‘मंडी’ आदि प्रमुख है। 

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