केरल बाढ़: क्या होती है "राष्ट्रीय आपदा" जिसपर हो रहा है इतना हंगामा

Aug 21 2018 02:52 PM
केरल बाढ़: क्या होती है

तिरुवनंतपुरम।  केरल में आयी भीषण बाढ़ त्रासदी को केंद्र सरकार ने गंभीर प्राकृतिक आपदा घोषित कर दिया है। इससे पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और कई अन्य नेता इस त्रासदी को 'राष्ट्रीय आपदा' घोसित किये जाने की मांग कर रहे थे। लेकिन इन सब खबरों के बिच लोगों के मन में ये सवाल भी उठ रहा है कि ये राष्ट्रीय आपदा आखिर होती क्या है और राज्य सरकार इसकी इतनी मांग क्यों करती है। 

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दरअसल भारत में बड़ी आपदाओं को लेकर 2005 में एक कानून बनाया गया। इस कानून को आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के नाम से जाना जाता है। इस कानून के अनुसार देश के किसी भी हिस्से में कोई बहुत बड़ी दुर्घटना या किसी दुर्घटना की वजह से कोई बहुत बड़ी विपत्ति आ जाये जिससे उबरना  प्रभावित इलाके के लोगों की क्षमता से परे हो, तो उसे आपदा की श्रेणी में गिना जाएगा।  

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भारत के किसी हिस्से में प्राकृतिक या इंसानी वजह से या किसी तरह की दुर्घटना के कारण कोई बहुत बड़ी विपत्ति आ जाए. कुछ बहुत बड़ी घटना हो जाए. या अनिष्ट आ जाए. और इनकी वजह से जान-माल का नुकसान हो. या लोगों को तकलीफ हो. या विनाश हो. या पर्यावरण का नुकसान हो. और ये सब जो हो, वो इतने बड़े स्तर पर हो जिसका सामना करना और जिससे निपटना (या उबरना) प्रभावित क्षेत्र के लोगों की क्षमता से परे हो, तो उसे आपदा की श्रेणी में गिना जाएगा। ये दुर्घटना कुदरती भी हो सकती है और इंसानी भी। 

इस कानून में आपदा को तो परिभाषित कर दिया गया था लेकिन इस बात का कोई जिक्र नहीं किया गया कि राष्ट्रीय आपदा किसे कहा जाएगा। इस वजह से देश में आज तक किसी भी दुर्घटना को राष्ट्रीय आपदा घोषित नहीं किया गया। फिर भले वो 2014 में कश्मीर घाटी में आई भीषण बाढ़ हो या फिर 1999 में आया कैटगरी-5 का ‘सुपर साइक्लोन’ हो जिसने 10,000 से ज्यादा लोगों की जान ले ली थी। 

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तो फिर राज्य सरकार क्यों करती है मांग ?
दरअसल संविधान के अनुसार राष्ट्रीय आपदा का कोई प्राधिकरण नहीं है लेकिन किसी भी राज्य में कोई बड़ी दुर्घटना होने पर वहां की सरकार राष्ट्रीय आपदा या गंभीर प्राकृतिक आपदा घोषित करने की मांग करती है क्योंकि ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार को आपदा से निपटने में पूरी मदद करनी होती है। ऐसे मामलो में केंद्र द्वारा प्रभावित राज्य में बचाव अभियान चलाने के साथ-साथ आर्थिक और खान -पान सम्बंधित मदद भी करनी होती है। 

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