क्या सिंधु जल बनेगा भारत-पाक शुष्क सम्बन्धों को सरस करने का जरिया ?

नई दिल्ली : पिछले साल सितंबर में जम्मू-कश्मीर के उरी सेक्टर में सेना के बेस कैम्प पर किये गये हमले के बाद से भारत -पाक के बीच बढ़ी खाई और सम्बन्धों में आई शुष्कता के कारण सिंधु जल संधि पर बात नही हो पाई थी.अब खबर आई हैं कि मार्च महीने के आखिर तक पाकिस्तान में आयोजित होने वाली एक बैठक में फिर से बात करने की संभावनाएं आकार ले रही हैं. यदि ऐसा हुआ तो इस बातचीत से दोनों देशों के बीच संबंधों में आई शुष्कता और कड़वाहट को दूर करने का मौका मिलेगा.

स्मरण रहे कि पीएम मोदी ने पिछले साल इस बैठक को भारत की ओर से रोके जाने के बाद कहा था कि पानी और खून एक साथ नहीं बह सकते. लेकिन यदि प्रति वर्ष मार्च में होने वाली इस प्रस्तावित बैठक में भारत शरीक होता हैं तो इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नवाज शरीफ के बीच 7-8 जून को कजाकिस्तान में शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन समिट के दौरान होने वाली बैठक का रास्ता भी खुल सकता है.

गौरतलब हैं कि सिंधु जल संधि के लिए 56 साल पहले स्थायी सिंधु आयोग बनाया गया था.स्थायी सिंधु आयोग में भारत और पाकिस्तान के अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल हैं. इस आयोग का गठन 1960 में हुई सिंधु जल संधि को लागू करने के लिए किया गया था.बता दें कि आयोग इससे जुड़े आंकड़ों का रखरखाव और इसका आदान-प्रदान करने के साथ ही दोनों देशों के बीच सहयोग में मदद करता है.

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