राजीव सरकार के तख्ता पलट की हुई थी साजिश

नई दिल्ली : राजीव गांधी को लेकर ख़बरों का दौर चलता ही रहता है और ना केवल खबरे बल्कि साथ ही इसको लेकर राजनीती को भी गर्म होते हुए आसानी से देखा जाता है. इस मामले को लेकर हाल ही में एक और नई बात सामने आई है. बताया जा रहा है कि पूर्व आर्मी कमांडर ले. जनरल पीएन हून की किताब "द अंटोल्ड ट्रुथ" में उनके द्वारा यह दावा किया गया है कि वर्ष 1987 के दौरान सेना के द्वारा राजीव गांधी सरकार के तख्ता पलट की साजिश की गई थी. इस किताब में ही यह बात भी सामने आई है कि पैरा-कमांडोज की तीन बटालियंस में से एक वेस्टर्न कमांड भी थी, जिसे एक्शन के लिए दिल्ली जाने के लिए कहा गया था.

इसके तहत ही यह बात भी सामने आई कि हून ने आरोप लगाते हुए यह कहा कि आर्मी चीफ जनरल कृष्णास्वामी सुंदरजी और ले. जनरल एसएफ रोड्रिगेउस भी इस तख्ता पलट की प्लानिंग में शामिल थे. इसके साथ ही यह बात भी सामने आई है कि तख्ता पलट को लेकर जो प्लानिंग की गई थी उसमे नेताओं को शामिल करने के बारे में सोचा गया था ताकि इस योजना को पूरी तरह से कामयाब बनाया जा सके. साथ ही ऐसे नेताओं की मदद लेने पर बात की जा रही थी जिनके राजीव गांधी से अच्छे सम्बद्ध नहीं रहे थे.

हनू के बारे में आपको बता दे कि वे अक्टूबर 1987 में रिटायर हुए थे. उन्होंने जानकारी में यह भी बताया है कि राजीव गांधी सरकार के एक कैबिनेट मिनिस्टर वीसी शुक्ला को भी आर्मी की एक्शन के बारे ने सम्पूर्ण जानकारी थी. यदि चैप्टर 10 को देखा जाये तो इस चैप्टर "गियानी जैल बनाम राजीव गांधी" में उन्होंने यह भी बताया है कि शुक्ला चंडीमंदिर भी इस मामले को लेकर उनसे मिलने आये थे.

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