उद्योगपतियों के लिए बढ़ी मुश्किलें, कर्मचारियों को ढूंढने में होगी दिक्कत

कोरोना की रोकथाम के लिए लॉकडाउन को लागू किया गया है. अब लॉकडाउन पार्ट-3 समाप्त होने पर 18 मई से कारखानों को चालू करने की अनुमति मिलती है तो गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र के उद्योगपतियों के लिए कर्मचारियों को ढूंढ़ने की सबसे बड़ी चुनौती होगी. इससे उत्पादन संबंधी काम कराना आसान नहीं होगा. दरअसल 90 प्रतिशत कर्मचारी लॉकडाउन में पलायन कर चुके हैं. भोपाल को छोड़ दें तो विदिशा, रायसेन, होशंगाबाद, बैतूल सहित छत्तीसगढ़, बिहार, राजस्थान के ज्यादातर कर्मचारी घर जा चुके हैं.

इस बारें में गोविंदपुरा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष अमरजीत सिंह ने बताया कि जिला प्रशासन व जिला उद्योग केंद्र को पत्र लिखकर सभी कारखानों को चालू करने की अनुमति मांगी है. फिलहाल अनुमति नहीं मिली है. लॉकडाउन पार्ट-3 समाप्त होने के बाद कारखानों को खोलने की अनुमति मिनले के बाद कर्मचारियों की भरपाई करना आसान नहीं होगा. औद्योगिक क्षेत्र में 1100 छोटे-बड़े उद्योग हैं. फर्मा व खाद्य पदार्थों के उत्पादन से संबंधी कारखानों में काम चालू है. बाकी सभी बंद हैं. अभी तक कर्मचारियों का वेतन दे रहे हैं. भविष्य में कारखाने शुरू नहीं हुआ तो वेतन देना मुश्किल होगा.

बता दें की औद्योगिक क्षेत्र के उद्योगपतियों को 18 मई से केंद्र सरकार की गाइडलाइन के मुताबिक कारखानों को चालू करने की अनुमति मिलने की उम्मीद है. अभी तक जिला व उद्योग केंद्र ने औद्योगिक क्षेत्र के आसपास लगी कॉलोनियों व चारों तरफ से खुला क्षेत्र होने से सभी कारखानों में काम चालू करने की अनुमति नहीं दी थी. अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मंगलवार को राहत पैकेज का ऐलान करने के बाद उद्योग जगत को काम शुरू करने की उम्मीद बंधी है.

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