अगर 'मोदी सरकार' ने नहीं, तो किसने बढ़ाए पेट्रोल-डीजल के भाव ?

नई दिल्ली: पूरे देश में पेट्रोल-डीजल के भाव अपने ऐतिहासिक ऊंचाई पर हैं. कई शहरों में पेट्रोल 110 रुपये प्रति लीटर के पार बिक रहा है. वहीं कई प्रदेश ऐसे हैं जहां डीजल का दाम भी 100 रुपये के पार पहुंच गया है. इस बीच महंगे तेल को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार चारों तरफ से आलोचना का सामना कर रही है. विपक्ष तेल की कीमतों को लेकर लगातार हमलावर हैं और पूरे देश में अलग-अलग जगहों पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.

तेल की कीमतों को लेकर मची मारामारी के बीच विभिन्न पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में इजाफे को लेकर विपक्ष के निशाने पर आई केंद्र सरकार ने कहा कि बीते एक वर्ष में पेट्रोल और डीजल पर केंद्र सरकारी की ओर से टैक्स में कोई इजाफा नहीं किया गया है. इस बात की जानकारी पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एक सवाल के लिखित जवाब में उच्च सदन में दी है  यह गौर करने वाली बात यह है कि अप्रैल 2020 से अभी तक पेट्रोल का भाव 32 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ चुका है.  पुरी ने कहा कि पिछले एक वर्ष में पेट्रोल और डीजल पर केंद्र सरकार ने टैक्स में कोई इजाफा नहीं किया है. हरदीप पुरी ने आगे कहा कि पेट्रोल और डीजल के खुदरा बिक्री भाव में हुई वृद्धि उच्च अंतरराष्ट्रीय उत्पाद मूल्यों और विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा वसूले गए VAT में वृद्धि के चलते आधार मूल्य में बढ़ोतरी की वजह से हुई है. उन्होंने कहा कि सरकार क्रूड आयल, पेट्रोल और डीजल के अंतरराष्ट्रीय मूल्य में अस्थिरता से संबंधित मुद्दे को विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठा रही है.

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पेट्रोल और डीजल के भाव को क्रमश: 26 जून 2010 और 19 अक्टूबर 2014 से बाजार निर्धारित बना दिया गया है. उसके बाद से सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियां अंतरराष्ट्रीय उत्पाद मूल्यों और अन्य बाजार दशाओं के आधार पर पेट्रोल और डीजल के मूल्य निर्धारण को लेकर फैसला लेती हैं. पुरी के अनुसार, पेट्रोल और डीजल के भाव तेल विपणन कंपनियों द्वारा अंतरराष्ट्रीय मूल्यों और रुपया-डॉलर विनिमय दर में होने वाली परिवर्तनों के आधार पर बढ़ाई गई हैं.

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