स्नान के एक दिन पूर्व शिप्रा में मिला ड्रेनेज वाॅटर, सिंहस्थ क्षेत्र में लगा अव्यवस्थाओं का अंबार

उज्जैन: मध्यप्रदेश के धार्मिक पर्यटन नगर उज्जैन में मौसम के बदलाव का व्यापक असर हुआ है. दरअसल यहां पर बारह वर्षों में एक बार लगने वाले सिंहस्थ मेले में अव्यवस्थाओं का अंबार लग गया है. मौसम में आए बदलाव के बाद अचानक बेमौसम हुई बारिश से जहां मोक्षदायिनी शिप्रा नदी में ड्रेनेज लाईन का पानी निकल गया. वहीं साधु-संतों के पांडालों में पानी जमा हो गया।

मेला क्षेत्र में कीचड़ और अव्यवस्था फैल गई. रामघाट क्षेत्र में बने पेंटून ब्रिज से कुछ दूरी पर ड्रेनेज की पाईपलाईन फूट गई. ऐसे में बारिश के पानी के ही साथ सड़कों पर जमा पानी, ड्रेनेज का पानी नदी में मिलने लगा. इस परेशानी का सामना करने के लिए मौके पर नगर निगम का अमला तक नहीं पहुंचा. हालात ये थे कि दूषित जल शिप्रा नदी में मिलता रहा मगर अधिकारी अपने में ही खोए रहे. नदी के पानी की सुध लेने वाला तक कोई नहीं था।

काफी देर तक नदी के पानी में ड्रेनेज का पानी मिलता रहा. उल्लेखनीय है कि सिंहस्थ वर्ष 2016 का महापर्व शहर के लिए बहुत मायने रखता है दरअसल यहां पर प्रति बारह वर्ष मे आने वाले इस महापर्व में देशी-विदेशी भक्त आते हैं, तो दूसरी ओर इस बार सिंहस्थ का आयोजन स्वच्छ भारत और ग्रीन सिंहस्थ ग्रीन उज्जैन के जुमलों के साथ हो रहा था. ऐसे में मेले में अव्यवस्था और शिप्रा में ड्रेनेज का पानी मिलने से यह एक गंभीर मसला हो गया है।

तो दूसरी ओर साधु संतों द्वारा सिंहस्थ 2016 के आयोजन से पूर्व शिप्रा को शुद्ध रखने और नालों के पानी को इसमें न मिलने देने के लिए आंदोलन किया गया था. साधु संतों ने शिप्रा की बिगड़ती हालत पर अपनी नाराजगी जताई थी. इसके बाद शिप्रा में गंदे नालों का पानी मिलने से रोकने के प्रयास किए गए थे. ऐसे में कान्ह डायवर्शन और खान डायवर्शन को लेकर तेजी से कोशिश की गई थी।

जिससे खान नदी का अशुद्ध जल शिप्रा नदी में न मिले. लेकिन इसके बाद भी शिप्रा नदी में ड्रेनेज का पानी अमावस्या के पर्व स्नान की पूर्व संध्या पर ही मिल गया. उल्लेखनीय है कि 6 मई को अमावस्या पर पर्व स्नान होना है. मगर बेमौसम हुई बारिश से सिंहस्थ मेला क्षेत्र की सारी व्यवस्थाऐं ही बदहाल हो गई हैं. संभावना है कि अव्यवस्था से आहत संत प्रशासन के प्रति अपनी नाराजगी व्यक्त कर सकते हैं। 

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