अस्पताल ने नहीं लिए नोट, गई नवजात की जान

मुंबई : भारत में केंद्र सरकार द्वारा 500 रूपए और 1000 रूपए के नोट बंद किए जाने के बाद लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। मगर नोटों के फेर में लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। कुछ लोगों को अस्पताल में 500 रूपए और 1000 रूपए के नोट न लिए जाने के कारण समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है। ऐसे ही हालात मुंबई के गोवंडी में सामने आए। दरअसल यहां पर एक प्रसूता को उपचार के लिए लाया गया। मगर नोटों को स्वीकार नहीं किए जाने के कारण प्रसूता को समय पर उपचार नहीं मिल पाया और ऐसे में उसकी मौत हो गई।

मिली जानकारी के अनुसार जगदीश शर्मा अपनी पत्नी किरण शर्मा को तेज़ लेबर पेन होने की शिकायत के दौरान नर्सिंग होम लेकर पहुंचे। उसका दर्द बढ़ता चला गया और बाद में प्रसूता ने रिश्तेदार व पड़ोसियों की सहायता से नवजात को जन्म दिया। जन्म के बाद बच्चे और मां को कुछ परेशानी होने लगी तो फिर दोनों को उपचार के लिए नर्सिंग होम ले जाया गया। मगर नर्सिंग होम में प्रसूता और बच्चे को प्रारंभिक उपचार देने के बाद भर्ती करने से इन्कार कर दिया गया।

दरअसल इसका कारण 500 रूपए के नोट का बंद हो जाना था। चिकित्सालय ने 500 रूपए के नोट लेने से मना कर दिया और जगदीश शर्मा के पास केवल 500 रूपए के ही नोट थे। उन्हें चिकित्सालय में 6000 रूपए ही जमा करवाने थे। दूसरी ओर बैंक के एटीएम सेंटर भी बंद थे। ऐसे में चिकित्सालय के प्रबंधकों ने प्रसूता और नवजात को अस्पताल में भर्ती करने से इन्कार कर दिया। ऐसे में नवजात की हालत बिगड़ गई उसे चेंबुल ले जाया गया लेकिन उसकी मौत हो गई।

जीवन ज्योति हाॅस्टिपटल एंड नर्सिंग होम में प्रसूता ज्योति को जगदीश जांच के लिए 8 नवंबर को ही लेकर पहुंचे थे। किरण की जांचें करवाई गई थीं जिसके बाद नर्सिंग होम की चिकित्सक ने उन्हें डिलीवरी का समय 7 दिसंबर के आसपास का दिया था लेकिन किरण को 9 नवंबर को ही तेज दर्द होने लगा और उसकी प्रसूती हो गई। ऐसे में अब चिकित्सालय पर सवाल उठाए जा रहे हैं। लापरवाही के मामले में चिकित्सक भी निशाने पर हैें। इस मामले की शिकायत शिवाजीनगर थाने में की गई है।

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