हाई कोर्ट ने माना- मुगलों ने गैर-मुस्लिमों पर किया था जुल्म, इस्लाम अपनाने को किया था मजबूर

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को उस जनहित याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया, जिसमें NCERT को अपनी कक्षा 12 की इतिहास की किताब से उन हिस्सों के हटाने की मांग की गई थी, जिसमें लिखा गया है कि शाहजहाँ और औरंगजेब ने अपने शासन के दौरान मंदिरों की मरम्मत के लिए दान दिया था. हालांकि, कोर्ट ने यह जरूर माना कि मुग़ल शासकों ने गैर-मुस्लिमों पर अत्याचार किया था और उन्हें मुस्लिम धर्म अपनाने के लिए मजबूर किया था.  मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और जस्टिस ज्योति सिंह की बेंच ने याचिका ख़ारिज करते हुए कहा कि खुद के मेहनती और ईमानदार छात्र" होने का दावा करने वाले याचिकाकर्ता चाहते हैं कि कोर्ट उनके तरीके से मुगल शासकों की नीतियों की समीक्षा करे. 

कोर्ट ने कहा कि आप कह रहे हैं कि आपको दिक्कत है कि शाहजहां और औरंगजेब की मंदिर मरम्मत आदि के लिए अनुदान देने के लिए ऐसी कोई नीति नहीं थी ? आप चाहते हैं कि हम शाहजहां और औरंगजेब की नीतियों के बारे में फैसला लें? हाई कोर्ट अब ये सब फैसला करेगा? कोर्ट ने कहा कि ये याचिका न्यायिक वक़्त बर्बाद कर रही है, साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ता को बिना शर्त याचिका वापस लेने को भी कहा.  दरअसल, याचिका में कहा गया है, 'भारतीय इतिहास में विषय-वस्तु भाग 2' की किताब के पैरा 2 से पृष्ठ 234 को बगैर किसी वैध स्रोत के प्रकाशित किया गया था और इसे सिर्फ मुगल सम्राट शाहजहां और औरंगजेब के शासनकाल को महिमामंडित करने के लिए शामिल किया गया था.'

इस पर उच्च न्यायालय ने कहा कि, यह सर्वविदित तथ्य है कि ज्यादातर मुगल सम्राटों ने हिंदू धर्म के लोगों से धार्मिक समारोह और तीर्थ यात्राओं के प्रदर्शन पर भारी टैक्स वसूला था. यह कोई नई बात नहीं है कि मुगल बादशाहों ने भी गैर-मुस्लिम लोगों को इस्लामिक धर्म अपनाने के लिए विवश किया था. याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि उन्होंने NCERT के जन सूचना अधिकारी के सामने एक RTI आवेदन भी दाखिल किया था, जिसमें कहा गया था कि उनकी फाइलों में 'मुगलों के लिए NCERT के निष्कर्ष के स्रोत" के संबंध में कोई जानकारी मौजूद नहीं थी.

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